भारत में वित्तीय व्यवस्था तेजी से डिजिटल और डेटा आधारित होती जा रही है, और इसी बदलाव के केंद्र में “क्रेडिट” (Credit) है।
जहां पहले क्रेडिट का मतलब सिर्फ बैंक से उधार लेना या क्रेडिट कार्ड इस्तेमाल करना था, वहीं अब यह आपकी पूरी वित्तीय पहचान का अहम हिस्सा बन चुका है।
2026 में लागू हो रहे नए नियमों और तकनीकी बदलावों ने क्रेडिट सिस्टम को और अधिक पारदर्शी, तेज और सख्त बना दिया है।क्या है क्रेडिट और क्यों है जरूरीक्रेडिट का सीधा मतलब है – उधार लेने की क्षमता।
जब कोई व्यक्ति बैंक या वित्तीय संस्था से पैसा उधार लेता है, तो उसकी भुगतान क्षमता और व्यवहार को “क्रेडिट स्कोर” के जरिए मापा जाता है।