असम के जोरहाट जिले में, भारतीय संस्कृति और ज्ञान की प्रतीक संस्कृत भाषा के सम्मान में, विश्व संस्कृत दिवस बड़े उत्साह और गरिमा के साथ मनाया गया।
इस महत्वपूर्ण अवसर पर स्थानीय संस्कृत प्रेमियों, विद्वानों, छात्रों और समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों ने एकजुट होकर न केवल संस्कृत के महत्व को रेखांकित किया, बल्कि इसे जोरहाट के हर गांव और हर घर तक पहुंचाने का दृढ़ संकल्प भी लिया।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य संस्कृत को केवल अकादमिक दायरे तक सीमित न रखकर, इसे आम जनजीवन का हिस्सा बनाना और विशेष रूप से ग्रामीण क्षेत्रों में इसकी पहुंच को बढ़ाना था, ताकि यह हमारी समृद्ध विरासत की पहचान बनी रहे।संस्कृत: भारतीय संस्कृति का आधारस्तंभकार्यक्रम में उपस्थित विद्वानों और शिक्षाविदों ने संस्कृत भाषा के गहन महत्व और भारतीय सभ्यता में उसकी केंद्रीय भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला।
उन्होंने बताया कि किस प्रकार संस्कृत केवल एक भाषा नहीं, बल्कि भारतीय दर्शन, विज्ञान, कला, साहित्य और आध्यात्मिक परंपराओं का मूल स्रोत है।