हाल ही में वैज्ञानिकों ने वैश्विक महासागरों में रिकॉर्ड तोड़ गर्मी दर्ज की है, जिसमें अभूतपूर्व रूप से 23 जेटाजूल अतिरिक्त ऊर्जा समाहित हो गई है।
यह स्थिति न केवल समुद्री जीवन और पारिस्थितिकी तंत्र के लिए गंभीर खतरा पैदा कर रही है, बल्कि दुनिया भर में विनाशकारी तूफानों, चक्रवातों और अतिवृष्टि जैसी प्राकृतिक आपदाओं की तीव्रता व आवृत्ति में भी चिंताजनक वृद्धि कर सकती है।
यह अत्यधिक गर्मी मानव-जनित जलवायु परिवर्तन का सीधा परिणाम है, जिसके दूरगामी और विनाशकारी प्रभाव अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगे हैं, जिससे दुनियाभर के तटीय क्षेत्रों और समुदायों पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है।रिकॉर्ड तोड़ तापमान और ऊर्जा अवशोषणवैज्ञानिक अध्ययनों से पता चला है कि महासागरों ने पिछले कुछ दशकों में लगातार गर्मी अवशोषित की है, लेकिन हालिया वर्ष में यह प्रक्रिया अभूतपूर्व स्तर पर पहुँच गई है।
23 जेटाजूल ऊर्जा की मात्रा को समझना मुश्किल हो सकता है, लेकिन यह लाखों परमाणु बमों की ऊर्जा के बराबर है जो लगातार समुद्र में छोड़ी जा रही है।