राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू, जो स्वयं एक आदिवासी समुदाय से आती हैं, छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले में आयोजित होने वाले ऐतिहासिक मुरिया दरबार में शिरकत करने वाली हैं।
इस विशेष अवसर पर वह बस्तर के आदिवासी समुदाय से सीधे संवाद स्थापित करेंगी और उनकी समस्याओं तथा मांगों को सुनेंगी।
यह आयोजन न केवल राष्ट्रपति के दौरे को महत्त्वपूर्ण बनाता है, बल्कि बस्तर की सदियों पुरानी लोकतांत्रिक परंपरा को भी पुनर्जीवित करता है, जहाँ शासक सीधे अपनी प्रजा से जुड़ते थे।
यह कार्यक्रम आदिवासियों के सशक्तिकरण और उनकी आवाज को राष्ट्रीय मंच पर लाने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।मुरिया दरबार: एक ऐतिहासिक परंपरामुरिया दरबार की परंपरा 14वीं सदी में काकतीय राजा अन्नमदेव द्वारा शुरू की गई थी।