भारत, जो मार्च 2026 में एक अभूतपूर्व तेल आपूर्ति और मूल्य संकट से जूझ रहा था, एक बार फिर ऊर्जा सुरक्षा को लेकर गंभीर चुनौती का सामना कर रहा है।
यमन के ईरान-समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा लाल सागर में सऊदी अरब के तेल निर्यात को बाधित करने की धमकी के बाद यह स्थिति उत्पन्न हुई है।
पहले से ही होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी व्यवधानों के बीच, यह नया खतरा वैश्विक कच्चे तेल की कीमतों को फिर से ऊपर धकेल सकता है और भारत की ऊर्जा आपूर्ति को बुरी तरह प्रभावित कर सकता है, जिसने हाल ही में रूसी कच्चे तेल पर निर्भरता बढ़ाकर अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत किया था।
यह घटनाक्रम ऐसे समय में आया है जब दुनिया अभी भी होर्मुज संकट से उबरने की कोशिश कर रही है, और अब लाल सागर में संभावित नाकेबंदी से वैश्विक तेल व्यापार पर गहरा असर पड़ने की आशंका है।लाल सागर में गहराता नया संकटईरान-समर्थित यमनी हूती समूह ने सऊदी अरब के खिलाफ समुद्री नाकेबंदी की धमकी दी है, जिसे वे सऊदी अरब द्वारा यमन की राजधानी की घेराबंदी के जवाब के रूप में बता रहे हैं।