छत्तीसगढ़ के बस्तर जिले से एक सकारात्मक और प्रेरणादायक खबर सामने आई है, जहां ‘उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम’ के तहत आयोजित महापरीक्षा ने शिक्षा की दिशा में एक नया अध्याय शुरू किया है।
इस पहल में 25 हजार से अधिक लोगों ने भाग लेकर यह साबित किया कि शिक्षा के प्रति जागरूकता अब समाज के हर वर्ग तक पहुंच रही है।📊 25 हजार से ज्यादा लोगों ने दी परीक्षाइस ऐतिहासिक पहल में बड़ी संख्या में लोगों ने हिस्सा लिया।कुल 25,706 परीक्षार्थियों ने भाग लिया पूरे जिले में 812 परीक्षा केंद्र बनाए गए बुजुर्ग, युवा और अलग-अलग वर्गों की भागीदारीयह आंकड़ा बताता है कि बस्तर में शिक्षा को लेकर एक बड़ा बदलाव आ रहा है।🏫 क्या है उल्लास महापरीक्षा अभियान?उल्लास महापरीक्षा ‘उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम’ का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य है:।अशिक्षित लोगों को शिक्षित बनानाबुनियादी पढ़ाई और गणित की समझ बढ़ानासमाज के हर वर्ग को शिक्षा से जोड़नायह अभियान सिर्फ परीक्षा नहीं, बल्कि एक सामाजिक बदलाव की पहल है।
👥 हर वर्ग की भागीदारी बनी खासइस कार्यक्रम की सबसे बड़ी खासियत इसकी व्यापक भागीदारी रही।बुजुर्गों ने भी उत्साह से परीक्षा दीयुवा और महिलाएं बड़ी संख्या में शामिलग्रामीण क्षेत्रों से भारी भागीदारीयह दिखाता है कि अब शिक्षा केवल बच्चों तक सीमित नहीं, बल्कि हर उम्र के लोगों के लिए जरूरी बन चुकी है।
🚔 कैदी और पूर्व माओवादी भी हुए शामिलइस महापरीक्षा की सबसे अनोखी बात यह रही कि इसमें समाज के उन वर्गों ने भी भाग लिया, जो मुख्यधारा से दूर थे।जेल में बंद 94 पुरुष और 47 महिला कैदी शामिल 28 आत्मसमर्पित माओवादी भी परीक्षा में बैठे यह पहल समाज में बदलाव और पुनर्वास की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है।🧠 कलेक्टर की पहल से मिला बड़ा परिणामइस पूरे अभियान का नेतृत्व जिला कलेक्टर आकाश छिकारा ने किया।शिक्षा को जनआंदोलन बनाने की कोशिशहर वर्ग को जोड़ने की रणनीतिप्रशासन और समाज का संयुक्त प्रयासइस पहल को आत्मनिर्भरता और आत्मविश्वास बढ़ाने की दिशा में अहम कदम बताया गया है।