बस्तर। छत्तीसगढ़ के बस्तर क्षेत्र में माओवादी हिंसा के कमजोर पड़ने के साथ ही विकास की नई संभावनाएं खुलने लगी हैं।
लंबे समय से संघर्ष और असुरक्षा के कारण रुके हुए प्रोजेक्ट अब गति पकड़ सकते हैं।
खासकर बोधघाट परियोजना, जो दशकों से चर्चा में रही है, अब क्षेत्र के जंगल अर्थशास्त्र को पूरी तरह बदलने की क्षमता रखती है।माओवादी प्रभाव घटने से खुला विकास का रास्ता।बस्तर में सुरक्षा बलों की लगातार कार्रवाई और सरकार की रणनीतियों के चलते माओवादी गतिविधियों में कमी आई है।
इसका सीधा असर स्थानीय विकास परियोजनाओं पर पड़ा है। जिन इलाकों में पहले प्रशासन की पहुंच सीमित थी, वहां अब सड़क, बिजली और जल संसाधनों से जुड़े कार्य तेज हो रहे हैं।