कभी अपनी नक्सल-प्रभावित पहचान के लिए जाना जाने वाला बस्तर अब तेजी से एक नए पर्यटन केंद्र के रूप में उभर रहा है।
छत्तीसगढ़ के दक्षिणी हिस्से में स्थित यह क्षेत्र, जो दशकों से हिंसा और अशांति का शिकार रहा है, अब अपनी अप्रतिम प्राकृतिक सुंदरता, समृद्ध आदिवासी संस्कृति और अनूठी जैव विविधता के दम पर पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है।
इस परिवर्तन के केंद्र में इको-टूरिज्म और होमस्टे मॉडल हैं, जो न केवल क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को गति दे रहे हैं, बल्कि स्थानीय समुदायों के लिए स्थायी रोजगार के अवसर भी पैदा कर रहे हैं, जिससे उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थिति में महत्वपूर्ण सुधार आ रहा है।
यह बदलाव बस्तर को एक नई दिशा दे रहा है, जहां प्रकृति का संरक्षण और स्थानीय लोगों का सशक्तिकरण साथ-साथ चल रहे हैं।बस्तर की बदलती पहचान: नक्सल से पर्यटन तकबस्तर का नाम सुनते ही एक समय लोगों के मन में नक्सलवाद और हिंसा की तस्वीरें उभरती थीं।