हाल ही में, छत्तीसगढ़ के किसी ग्रामीण अंचल में प्रशासन द्वारा एक अनूठी पहल की गई, जहाँ महुआ पेड़ की छांव तले जनसमस्याओं का एक विशेष दरबार आयोजित किया गया।
इस अनौपचारिक वातावरण में सैकड़ों ग्रामीणों ने अपनी शिकायतें और आवेदन लेकर प्रशासन के समक्ष प्रस्तुत किए।
इस दरबार में 500 से अधिक आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 38 समस्याओं का मौके पर ही, तत्काल निराकरण कर दिया गया।
इस पहल का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण जनता की समस्याओं को सीधे सुनना, उन्हें समझना और लालफीताशाही से बचाते हुए त्वरित और पारदर्शी तरीके से उनका समाधान करना था, जिससे दूर-दराज के क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को अपनी परेशानियों के लिए बार-बार सरकारी दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।