प्रख्यात साहित्यकार और विचारक मीर अली मीर ने हाल ही में छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में आयोजित एक साहित्यिक संगोष्ठी में साहित्य को समाज की आधारशिला बताया।
उन्होंने दृढ़तापूर्वक कहा कि राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और साहित्यिक परंपराओं को सहेजने तथा आगे बढ़ाने की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी छत्तीसगढ़ के युवाओं पर है।
मीर ने जोर दिया कि साहित्य केवल मनोरंजन नहीं, बल्कि सामाजिक मूल्यों, नैतिकताओं और पहचान को गढ़ने वाला शक्तिशाली माध्यम है।
उन्होंने युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने और अपनी भाषा व साहित्य में रुचि विकसित करने का आह्वान किया।साहित्य: सामाजिक संरचना का अटूट आधारमीर अली मीर ने अपने वक्तव्य में साहित्य को समाज का दर्पण बताया, जो उसकी प्रगति, संघर्षों और आकांक्षाओं को प्रतिबिंबित करता है।