1857 का हैदराबाद विद्रोह: एक शुक्रवार का उपदेश और इतिहास का दिन

17 जुलाई, 1857 को, जब उत्तर भारत में ब्रिटिश राज के खिलाफ विद्रोह की ज्वाला धधक रही थी, तब हैदराबाद भी इससे अछूता नहीं रहा।

इस ऐतिहासिक दिन, मक्का मस्जिद में एक प्रभावशाली शुक्रवार के उपदेश के बाद, मौलवी अलाउद्दीन और तुर्रेबाज खान के नेतृत्व में लगभग 3,000 लोगों की भीड़ ने शहर की दीवारों से बाहर निकलकर ब्रिटिश रेजीडेंसी के बेगम दरवाजा पर धावा बोल दिया।

यह घटना 1857 के भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में हैदराबाद की भूमिका का एक महत्वपूर्ण अध्याय है, जो अक्सर मुख्यधारा के इतिहास में अनदेखा रह जाता है।

इस हमले का उद्देश्य ब्रिटिश सत्ता को चुनौती देना था, यद्यपि ब्रिटिश रेजीडेंट इस हमले में बच गए, लेकिन इस घटना के बाद रेजीडेंसी को एक सुदृढ़ किलेबंदी में बदल दिया गया, जो इस विद्रोह की गंभीरता और हैदराबाद के लोगों के प्रतिरोध को दर्शाता है।क्रांति की चिंगारी: एक शुक्रवार का उपदेश17 जुलाई, 1857 की सुबह हैदराबाद के लिए एक सामान्य शुक्रवार की सुबह नहीं थी।

1857 का हैदराबाद विद्रोह: एक शुक्रवार का उपदेश और इतिहास का दिन

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