देवभूमि उत्तराखंड में चारधाम यात्रा अपने पूरे जोरों पर है, जहां केदारनाथ, बद्रीनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री धामों में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ रही है।
इसी के साथ, टिहरी गढ़वाल की शांत वादियों में स्थित बूढ़ा केदारधाम, जिसे उत्तराखंड का 'पांचवां धाम' भी कहा जाता है, इन दिनों आस्था का नया केंद्र बनकर उभरा है।
बालगंगा और धर्मगंगा नदियों के पवित्र संगम पर बसा यह प्राचीन स्थल, वर्षभर अपने कपाट खुले रखता है, जिससे चारधाम यात्रा पर आए श्रद्धालु आसानी से यहां दर्शन के लिए पहुंच रहे हैं।
महाभारत काल से जुड़े इसके गहरे इतिहास और नाथ संप्रदाय की सदियों पुरानी अनोखी परंपरा के कारण, यह धाम भक्तों को न केवल आध्यात्मिक शांति प्रदान करता है बल्कि प्रकृति का अद्भुत संगम भी दिखाता है।'पांचवें धाम' बूढ़ा केदार का बढ़ता महत्वउत्तराखंड, जिसे देवभूमि के नाम से जाना जाता है, अपने चारधामों के लिए विश्वभर में प्रसिद्ध है।