पेरिस स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स (पीएसई) से जुड़ी प्रतिष्ठित शोध संस्था वर्ल्ड इनइक्वैलिटी लैब (डब्ल्यूआईलैब) ने अपनी 'ग्लोबल जस्टिस रिपोर्ट: ए प्लान फॉर इक्वैलिटी एंड प्रोस्पेरिटी विद प्लैनेटरी बाउंड्रीज' में एक बड़ा दावा किया है।
इस रिपोर्ट के अनुसार, भारत अपनी तेज आर्थिक और जनसांख्यिकीय रफ्तार के दम पर साल 2060 तक क्रय शक्ति समता (पीपीपी) के आधार पर वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में हिस्सेदारी के मामले में चीन को पीछे छोड़ने के लिए तैयार है।
यह अनुमान वैश्विक अर्थव्यवस्था के पटल पर आने वाले दशकों में एक ऐतिहासिक बदलाव का संकेत देता है, जहाँ 21वीं सदी के उत्तरार्ध में बीजिंग के आर्थिक दबदबे में तेज गिरावट आएगी और दुनिया एक बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ेगी।
यह रिपोर्ट भारत के लिए एक बड़ी उपलब्धि और वैश्विक आर्थिक शक्ति के रूप में उसकी बढ़ती भूमिका को रेखांकित करती है।वैश्विक अर्थव्यवस्था का बदलता परिदृश्यवर्ल्ड इनइक्वैलिटी लैब की यह रिपोर्ट वैश्विक आर्थिक शक्ति संतुलन में एक महत्वपूर्ण बदलाव की भविष्यवाणी करती है।