नेपाल की बाढ़ सिर्फ शुरुआत: वैश्विक तबाही का मंडराता खतरा

हाल ही में नेपाल-तिब्बत सीमा पर अचानक आई विनाशकारी बाढ़ ने भयंकर तबाही मचाई है, जिसमें सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है और 2400 से ज्यादा लोग अभी भी लापता हैं।

यह त्रासदी लांगटांग-लिरुंग पर्वत पर ग्लेशियर के ढहने के कारण हुई मानी जा रही है, हालांकि इसकी पूरी और सटीक जानकारी सामने आने में कई महीने लग सकते हैं।

यह घटना केवल एक स्थानीय आपदा नहीं है, बल्कि वैज्ञानिकों ने इसे दुनिया भर के लिए एक गंभीर चेतावनी बताया है। लीड्स विश्वविद्यालय के ग्लेशियल बाढ़ विशेषज्ञ डॉ.

जोनाथन कैरिविक सहित अन्य विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण यह कोई एक बार होने वाली घटना नहीं है, बल्कि यह भविष्य में होने वाली कई ऐसी ही भयावह घटनाओं की शुरुआत भर है, जिससे दुनिया भर की डेढ़ करोड़ आबादी सीधे तौर पर खतरे में है।ग्लेशियर पिघलने का बढ़ता वैश्विक खतराजलवायु परिवर्तन के कारण पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है, जिससे ध्रुवीय क्षेत्रों और उच्च पर्वतीय श्रृंखलाओं के ग्लेशियर तेजी से पिघल रहे हैं।

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