भारत की ‘मगरमच्छ डिटरेंट’ योजना पर विवाद: मानवाधिकार और पर्यावरण को लेकर उठे गंभीर सवाल

भारत की सीमा सुरक्षा से जुड़ी एक नई और असामान्य योजना को लेकर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बहस तेज हो गई है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत-बांग्लादेश सीमा के कुछ संवेदनशील इलाकों में अवैध घुसपैठ और तस्करी रोकने के लिए मगरमच्छ और जहरीले सांप जैसे जंगली जीवों का इस्तेमाल “प्राकृतिक अवरोध” के रूप में करने पर विचार किया जा रहा है।

इस प्रस्ताव ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं, पर्यावरणविदों और नीति विशेषज्ञों के बीच तीखी प्रतिक्रिया पैदा कर दी है।क्या है पूरा मामलारिपोर्ट के मुताबिक, भारत-बांग्लादेश सीमा लगभग 4,096 किलोमीटर लंबी है, जिसमें कई हिस्से ऐसे हैं जहां भौगोलिक परिस्थितियों—जैसे नदियां, दलदली इलाके और घने जंगल—के कारण पारंपरिक बाड़ (फेंसिंग) लगाना मुश्किल है।

ऐसे “रिवराइन गैप” यानी नदी वाले हिस्सों में सीमा सुरक्षा बल (BSF) ने कथित तौर पर प्राकृतिक तरीकों से सुरक्षा बढ़ाने के विकल्प तलाशने को कहा है।इसी संदर्भ में मगरमच्छ और विषैले सांपों को तैनात करने का विचार सामने आया है, ताकि ये जीव अवैध पार करने वालों के लिए डर पैदा करें और उन्हें रोक सकें।मानवाधिकार संगठनों की कड़ी प्रतिक्रियाइस प्रस्ताव पर मानवाधिकार कार्यकर्ताओं ने गंभीर चिंता जताई है।

भारत की ‘मगरमच्छ डिटरेंट’ योजना पर विवाद: मानवाधिकार और पर्यावरण को लेकर उठे गंभीर सवाल

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