अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रबंध निदेशक क्रिस्टालिना जॉर्जीवा ने हाल ही में भारत की उस महत्वपूर्ण भूमिका की सराहना की है जो वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) को विकासशील देशों के लिए सुलभ और लोकतांत्रिक बनाने में निभा रहा है।
उन्होंने जोर दिया कि भारत का यह प्रयास वैश्विक स्तर पर समावेशी विकास को बढ़ावा देने और डिजिटल विभाजन को पाटने की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है।
जॉर्जीवा के अनुसार, भारत अपने मजबूत डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) मॉडल के माध्यम से एआई क्रांति का लाभ समाज के सभी वर्गों तक पहुँचाने का एक सफल उदाहरण पेश कर रहा है, जो अन्य विकासशील राष्ट्रों के लिए एक प्रेरणा स्रोत बन सकता है।
उनका यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में एआई तकनीक के तेजी से विस्तार और उसके सामाजिक-आर्थिक प्रभावों पर गहन चर्चा चल रही है।भारत का डिजिटल नेतृत्व और एआई का लोकतंत्रीकरणभारत ने पिछले कुछ वर्षों में अपने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (डीपीआई) को अभूतपूर्व रूप से विकसित किया है, जिसमें आधार जैसी विशिष्ट पहचान प्रणाली, यूपीआई (यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस) जैसा त्वरित भुगतान तंत्र और ओएनडीसी (ओपन नेटवर्क फॉर डिजिटल कॉमर्स) जैसे खुले डिजिटल नेटवर्क शामिल हैं।