छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में, विशेषकर पड़ोसी राज्य ओडिशा से सटे क्षेत्रों में, हाल ही में नई फसल के आगमन का प्रतीक नुआखाई पर्व अत्यंत हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ मनाया गया।
यह पर्व किसानों द्वारा अपनी मेहनत से उगाई गई पहली फसल के लिए प्रकृति और देवताओं के प्रति आभार व्यक्त करने का एक अनूठा अवसर होता है।
इस वर्ष भी, भादो मास की पंचमी तिथि पर, किसानों ने अपने खेतों से लाई गई नई धान की बालियों को सर्वप्रथम देवी-देवताओं को अर्पित किया, जिसके बाद ही उन्होंने स्वयं इसका सेवन किया।
इस उत्सव में मूंग के विभिन्न पकवान, महुआ के पत्तलों पर भोजन परोसना और खेतों में दूध का अर्पण जैसी विशिष्ट परंपराएं शामिल हैं, जो इसे छत्तीसगढ़ के सांस्कृतिक परिदृश्य का एक अभिन्न अंग बनाती हैं।