बस्तर में 50 साल बाद तिरंगा, नक्सलवाद से मुक्ति की नई सुबह

बस्तर के अंदरूनी इलाकों में, जहाँ पिछले 50 सालों से नक्सली खौफ के कारण काला झंडा फहराया जाता था, अब वहाँ बच्चों ने गर्व से तिरंगा थाम लिया है।

यह ऐतिहासिक पल छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा जिले के गुमियापाल जैसे गांवों में देखने को मिला, जहाँ नक्सलवाद की काली छाया हटने के बाद पहली बार स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस जैसे राष्ट्रीय पर्व मनाए जा रहे हैं।

यह घटना न केवल एक प्रतीक है, बल्कि यह क्षेत्र में सुरक्षा बलों की सफल रणनीति, सरकार की विकास पहलों और स्थानीय ग्रामीणों की बदलती सोच का भी परिणाम है, जिसने बस्तर को मुख्यधारा से जुड़ने का एक नया अवसर प्रदान किया है।एक नए युग की शुरुआतदंतेवाड़ा जिले के गुमियापाल गांव में, जहाँ कभी नक्सलियों की समानांतर सरकार चलती थी और उनका काला झंडा ही एकमात्र पहचान था, आज वहाँ भारत का राष्ट्रीय ध्वज तिरंगा शान से लहरा रहा है।

यह दृश्य उन लाखों ग्रामीणों के लिए आशा की किरण है, जिन्होंने पांच दशकों तक डर और अलगाव में जीवन बिताया।

बस्तर में 50 साल बाद तिरंगा, नक्सलवाद से मुक्ति की नई सुबह

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