हाल ही में, भारतीय नौसेना ने समुद्री सुरक्षा को मजबूत करने और नौसेना युद्ध में बड़े बदलाव लाने के उद्देश्य से मानवरहित स्वायत्त प्रणालियों (Unmanned Autonomous Systems - UAS) के एकीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
इसमें सामरिक मल्टी-कॉप्टर निगरानी ड्रोन के लिए सूचना के लिए अनुरोध (RFI) जारी करना और नौसेना शिपबोर्न मानवरहित हवाई प्रणाली (NSUAS) की खरीद के लिए रक्षा अधिग्रहण परिषद (DAC) से 52,000 करोड़ रुपये की खरीद योजना को मंजूरी मिलना शामिल है।
वहीं, रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) का नौसेना विज्ञान और प्रौद्योगिकी प्रयोगशाला (NSTL) उच्च सहनशक्ति वाले स्वायत्त पानी के भीतर वाहन (Autonomous Underwater Vehicle - AUV*) विकसित कर रहा है।
ये सभी पहलें भारत को वैश्विक रुझान के साथ जोड़ती हैं, जहाँ अमेरिकी और ब्रिटिश नौसेनाएँ भी अपने बेड़े में मानवरहित प्रणालियों को तेजी से एकीकृत कर रही हैं, जिससे समुद्री युद्ध का भविष्य पूरी तरह से बदलने को तैयार है।भारतीय नौसेना की हवाई निगरानी क्षमता में वृद्धिभारतीय नौसेना ने हाल ही में सामरिक मल्टी-कॉप्टर निगरानी ड्रोन के लिए सूचना के लिए अनुरोध (RFI) जारी करके मानवरहित प्रणालियों को समुद्री सुरक्षा में और एकीकृत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है।