मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले में स्थित पांढुर्णा में प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला विश्व प्रसिद्ध गोटमार मेला इस बार भी पारंपरिक उत्साह के साथ 11 सितंबर को मनाया जाएगा।
जाम नदी के किनारे, जहां यह सदियों पुरानी परंपरा निभाई जाती है, एक बार फिर पत्थरों का यह अनूठा खेल देखने को मिलेगा।
यह मेला पांढुर्णा और सावरगांव के ग्रामीणों के बीच पत्थरों की बौछार के लिए जाना जाता है, जो एक प्राचीन लोक कथा और सांस्कृतिक विरासत का हिस्सा है, हालांकि इसमें सुरक्षा संबंधी चुनौतियां भी निहित हैं।
प्रशासन ने इस आयोजन को शांतिपूर्ण और सुरक्षित ढंग से संपन्न कराने के लिए विस्तृत तैयारियां की हैं, ताकि परंपरा का निर्वहन हो सके और किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके।गोटमार मेले का इतिहास और महत्वगोटमार मेले का इतिहास 300 साल से भी अधिक पुराना बताया जाता है, जिसकी जड़ें एक प्रेमकथा और बलिदान में निहित हैं।