छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में स्थित अबूझमाड़ के दुर्गम और घने जंगलों में रहने वाले आदिवासी परिवारों की आजीविका का प्रमुख आधार सदियों से लघु वनोपज रही है।
इनमें तेन्दूपत्ता, जिसे स्थानीय लोग 'हरा सोना' भी कहते हैं, उनकी वार्षिक आय का सबसे बड़ा स्रोत है।
एक महत्वपूर्ण बदलाव के तहत, साल 2026 में पहली बार 22 गांवों के 365 तेन्दूपत्ता संग्राहकों को अपने ही गांव के पास 10 नए संग्रहण केंद्रों (फड़) पर तेन्दूपत्ता बेचने की सुविधा मिली है।
यह पहल नक्सल प्रभाव में कमी और सुरक्षा व्यवस्था में सुधार का सीधा परिणाम है, जिससे इन परिवारों को आर्थिक स्वतंत्रता और सुरक्षा का एक नया अनुभव प्राप्त हुआ है।