विश्व प्रसिद्ध पुरी रथ यात्रा के पावन अवसर पर, महाप्रभु श्री जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र, देवी सुभद्रा और चक्रराज सुदर्शन (चतुरधा मूर्ति) की 'आड़प मंडप बिजे' नीति का भव्य शुभारंभ हो गया है।
रथों पर भक्तों को दर्शन देने के उपरांत, इन चारों विग्रहों को पारंपरिक 'गोटी पहंडी' अनुष्ठान के जरिए श्री गुंडिचा मंदिर के जन्मवेदी, जिसे आड़प मंडप भी कहा जाता है, में विराजमान कराया जा रहा है।
यह पवित्र अनुष्ठान पुरी के शरदधाबाली पर भव्य रूप से खड़े तीन विशाल रथों – तालध्वज, दर्पदलन और नंदीघोष – से शुरू हुआ, जहां लाखों श्रद्धालु इस अलौकिक क्षण के साक्षी बनने के लिए उमड़ पड़े हैं।
इस नीति का मुख्य उद्देश्य धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते हुए भक्तों को जन्मवेदी पर महाप्रभु के विशेष 'आड़प दर्शन' और पवित्र 'आड़प महाप्रसाद' का सौभाग्य प्रदान करना है।'आड़प मंडप बिजे' अनुष्ठान का आध्यात्मिक महत्वरथ यात्रा के दौरान महाप्रभु का गुंडिचा मंदिर में नौ दिनों तक प्रवास होता है, जिसे उनकी मौसी का घर माना जाता है।