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पुरी रथ यात्रा: महाप्रभु जगन्नाथ जन्मवेदी में विराजमान, आड़प मंडप बिजे शुरू

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पुरी रथ यात्रा: महाप्रभु जगन्नाथ जन्मवेदी में विराजमान, आड़प मंडप बिजे शुरू
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विश्व प्रसिद्ध पुरी रथ यात्रा के पावन अवसर पर, महाप्रभु श्री जगन्नाथ, बड़े भाई बलभद्र, देवी सुभद्रा और चक्रराज सुदर्शन (चतुरधा मूर्ति) की 'आड़प मंडप बिजे' नीति का भव्य शुभारंभ हो गया है। रथों पर भक्तों को दर्शन देने के उपरांत, इन चारों विग्रहों को पारंपरिक 'गोटी पहंडी' अनुष्ठान के जरिए श्री गुंडिचा मंदिर के जन्मवेदी, जिसे आड़प मंडप भी कहा जाता है, में विराजमान कराया जा रहा है। यह पवित्र अनुष्ठान पुरी के शरदधाबाली पर भव्य रूप से खड़े तीन विशाल रथोंतालध्वज, दर्पदलन और नंदीघोष – से शुरू हुआ, जहां लाखों श्रद्धालु इस अलौकिक क्षण के साक्षी बनने के लिए उमड़ पड़े हैं। इस नीति का मुख्य उद्देश्य धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करते हुए भक्तों को जन्मवेदी पर महाप्रभु के विशेष 'आड़प दर्शन' और पवित्र 'आड़प महाप्रसाद' का सौभाग्य प्रदान करना है।

'आड़प मंडप बिजे' अनुष्ठान का आध्यात्मिक महत्व

रथ यात्रा के दौरान महाप्रभु का गुंडिचा मंदिर में नौ दिनों तक प्रवास होता है, जिसे उनकी मौसी का घर माना जाता है। 'आड़प मंडप बिजे' इसी प्रवास की शुरुआत का एक महत्वपूर्ण चरण है। पारंपरिक 'गोटी पहंडी' अनुष्ठान के अनुसार, सबसे पहले भगवान मदनमोहन और रामकृष्ण जी की पहंडी प्रक्रिया सफलतापूर्वक संपन्न हुई। इसके बाद क्रमशः चक्रराज सुदर्शन, बड़े भाई बलभद्र, पूजनीय देवी सुभद्रा और अंत में जगत के नाथ महाप्रभु श्री जगन्नाथ जी को दैतापति सेवायत पारंपरिक 'गोटी पहंडी' के माध्यम से जन्मवेदी के अंदर ले गए। यह प्रक्रिया अत्यंत धीमी और लयबद्ध होती है, जिसमें सेवायत विग्रहों को धीरे-धीरे आगे बढ़ाते हैं। इस दौरान श्रद्धालु 'जय जगन्नाथ' और 'हरि बोल' के जयघोष से वातावरण को गुंजायमान कर देते हैं। भगवान के इस अलौकिक पहंडी स्वरूप के दर्शन करने के लिए शरदधाबाली और गुंडिचा मंदिर के बाहर देश-विदेश से आए लाखों श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ी हुई है, जो इस दिव्य क्षण का साक्षी बनने को आतुर है। यह अनुष्ठान भक्तों के लिए एक अद्वितीय अनुभव होता है, जब वे रथों से उतरकर भगवान को जन्मवेदी की ओर बढ़ते देखते हैं। यह चरण न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि भक्तों को भगवान के करीब लाने का एक भावनात्मक और आध्यात्मिक सेतु भी प्रदान करता है।

सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम और जनसैलाब का प्रबंधन

इस पवित्र 'आड़प बिजे' नीति को बिना किसी बाधा के और पूरी तरह से अनुशासित ढंग से संपन्न कराने के लिए श्री मंदिर प्रशासन (SJTA), दैतापति सेवायतों और ओडिशा पुलिस प्रशासन की ओर से व्यापक प्रबंध किए गए हैं। भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए, तीनों रथों के चारों ओर एक कड़ा सुरक्षा घेरा तैयार किया गया है। सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत रखने के लिए इनर (आंतरिक) और आउटर (बाहरी) कॉर्डन बनाए गए हैं, जो भीड़ को नियंत्रित करने और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने में सहायक सिद्ध हो रहे हैं। इसके साथ ही, भारी संख्या में विशेष पुलिस बल और सादे कपड़ों में खुफिया पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है, ताकि कानून व्यवस्था बनी रहे और श्रद्धालु सुरक्षित रूप से दर्शन कर सकें। पुलिस प्रशासन ने ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी फुटेज के माध्यम से भी भीड़ पर लगातार निगरानी रखी हुई है, जिससे किसी भी संभावित खतरे को समय रहते पहचाना जा सके। यह विस्तृत सुरक्षा योजना लाखों श्रद्धालुओं को बिना किसी परेशानी के इस धार्मिक आयोजन का हिस्सा बनने और भगवान के दर्शन का लाभ उठाने में सहायक है।

जन्मवेदी पर आड़प दर्शन और महाप्रसाद का दुर्लभ सौभाग्य

आज रात 'आड़प मंडप बिजे' नीति के सफलतापूर्वक संपन्न होने के बाद, कल यानी रविवार से आम श्रद्धालु जन्मवेदी पर महाप्रभु के भव्य 'आड़प दर्शन' कर सकेंगे। यह नौ दिनों का विशेष दर्शन होता है, जब भगवान गुंडिचा मंदिर में वास करते हैं। इसके साथ ही भक्तों को पुरी का सबसे पवित्र और दुर्लभ माना जाने वाला 'आड़प अभड़ा' (Adapa Abhada/Mahaprasad) पाने का परम सौभाग्य भी प्राप्त होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, रथ यात्रा के दौरान गुंडिचा मंदिर में महाप्रसाद का सेवन करने से करोड़ों पुण्यों का लाभ मिलता है और यह मोक्ष प्राप्ति का एक मार्ग प्रशस्त करता है। यह महाप्रसाद सामान्य दिनों में पुरी मंदिर में मिलने वाले महाप्रसाद से थोड़ा भिन्न होता है और इसकी अपनी एक विशेष महिमा है। श्रद्धालु इन नौ दिनों तक प्रतिदिन भगवान के दर्शन और महाप्रसाद ग्रहण करने के लिए गुंडिचा मंदिर में उमड़ते रहेंगे। यह अवसर भक्तों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है, क्योंकि यह उन्हें सीधे भगवान के जन्मवेदी पर उनके सान्निध्य में समय बिताने का मौका देता है, जो आस्था और भक्ति को गहरा करता है।

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