छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में महिलाएं अब केवल घर की चौखट तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे आर्थिक स्वावलंबन की नई इबारत लिख रही हैं।
राज्य सरकार की दूरदर्शी नीतियों और उनके अथक परिश्रम के फलस्वरूप, स्व-सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी हजारों महिलाएं रेडी-टू-ईट (RTE) पोषण आहार के निर्माण और वितरण से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं।
यह पहल न केवल उन्हें वित्तीय रूप से सशक्त कर रही है, बल्कि उनके परिवारों और समुदाय के पोषण स्तर में सुधार लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है।
यह कार्यक्रम समग्र विकास की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है, जहाँ महिलाएं उद्यमी बनकर अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर रही हैं, जिससे सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य में सकारात्मक बदलाव आ रहा है।