छत्तीसगढ़ 7 मिनट पढ़ें

छत्तीसगढ़ में रेडी-टू-ईट से महिला सशक्तिकरण: आत्मनिर्भरता की नई मिसाल

इस खबर की वेब स्टोरी देखें
3 व्यूज़
छत्तीसगढ़ में रेडी-टू-ईट से महिला सशक्तिकरण: आत्मनिर्भरता की नई मिसाल
छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के ग्रामीण अंचलों में महिलाएं अब केवल घर की चौखट तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे आर्थिक स्वावलंबन की नई इबारत लिख रही हैं। राज्य सरकार की दूरदर्शी नीतियों और उनके अथक परिश्रम के फलस्वरूप, स्व-सहायता समूहों (SHG) से जुड़ी हजारों महिलाएं रेडी-टू-ईट (RTE) पोषण आहार के निर्माण और वितरण से जुड़कर आत्मनिर्भर बन रही हैं। यह पहल न केवल उन्हें वित्तीय रूप से सशक्त कर रही है, बल्कि उनके परिवारों और समुदाय के पोषण स्तर में सुधार लाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। यह कार्यक्रम समग्र विकास की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम है, जहाँ महिलाएं उद्यमी बनकर अपनी क्षमता का प्रदर्शन कर रही हैं, जिससे सामाजिक-आर्थिक परिदृश्य में सकारात्मक बदलाव आ रहा है। यह मॉडल ग्रामीण महिलाओं की छिपी हुई क्षमता को उजागर कर रहा है, जिससे वे न केवल स्वयं के लिए बल्कि पूरे समाज के लिए एक प्रेरणा बन रही हैं।

आत्मनिर्भरता की नई गाथा

छत्तीसगढ़ में महिला सशक्तिकरण का यह मॉडल ठेकेदारी प्रथा को समाप्त कर स्थानीय महिलाओं को सीधे उत्पादन प्रक्रिया से जोड़कर शुरू किया गया। पहले रेडी-टू-ईट पोषण आहार का उत्पादन निजी ठेकेदारों द्वारा किया जाता था, लेकिन अब यह जिम्मेदारी पूरी तरह से महिला स्व-सहायता समूहों को सौंप दी गई है। इस बदलाव ने ग्रामीण महिलाओं के लिए आय के नए रास्ते खोले हैं। राज्य में लगभग 11,000 से अधिक स्व-सहायता समूह इस कार्य में सक्रिय रूप से लगे हुए हैं, जिससे प्रत्यक्ष रूप से 1 लाख से अधिक महिलाओं को रोजगार मिला है। ये समूह विभिन्न प्रकार के पोषण उत्पाद जैसे फोर्टिफाइड दलिया, पोषक लड्डू मिश्रण, सूखे मेवे और अन्य पूरक आहार तैयार करते हैं, जो बच्चों, गर्भवती महिलाओं और शिशुवती माताओं के लिए अत्यंत पौष्टिक होते हैं। यह कार्यक्रम महिलाओं को न केवल आर्थिक रूप से मजबूत बना रहा है, बल्कि उन्हें उत्पादन, गुणवत्ता नियंत्रण, पैकेजिंग और विपणन जैसे महत्वपूर्ण कौशलों में भी प्रशिक्षित कर रहा है, जिससे उनकी व्यावसायिक क्षमता में वृद्धि हो रही है और वे छोटे पैमाने की उद्यमी बन रही हैं।

पोषण अभियान में महिलाओं का योगदान

यह पहल केवल महिलाओं की आय बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ के महत्वाकांक्षी मुख्यमंत्री सुपोषण अभियान और एकीकृत बाल विकास सेवा (ICDS) कार्यक्रम को भी मजबूती प्रदान कर रही है। स्व-सहायता समूहों द्वारा निर्मित रेडी-टू-ईट पोषण आहार राज्य भर के लगभग 52,000 आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से वितरित किया जाता है। इससे लाखों बच्चों और महिलाओं को उच्च गुणवत्ता वाला, स्वच्छ और स्थानीय रूप से उत्पादित पौष्टिक भोजन मिल रहा है। यह स्थानीय उत्पादन मॉडल यह सुनिश्चित करता है कि भोजन की गुणवत्ता और ताजगी बनी रहे, साथ ही वितरण श्रृंखला में पारदर्शिता भी आती है। महिलाएं स्वयं अपने हाथों से पोषण आहार तैयार करती हैं, जिससे उनमें स्वामित्व की भावना आती है और उत्पाद की गुणवत्ता के प्रति उनकी प्रतिबद्धता बढ़ जाती है। इस पहल से कुपोषण दर में भी उल्लेखनीय कमी देखी गई है, खासकर 5 वर्ष से कम आयु के बच्चों और एनीमिया से पीड़ित महिलाओं में। यह दर्शाता है कि जब महिलाओं को अवसर मिलते हैं, तो वे न केवल अपने लिए बल्कि पूरे समाज के लिए सकारात्मक परिवर्तन ला सकती हैं और एक स्वस्थ पीढ़ी के निर्माण में अहम भूमिका निभा सकती हैं।

सरकारी समर्थन और भविष्य की राह

छत्तीसगढ़ सरकार ने इस महिला-केंद्रित विकास मॉडल को सफल बनाने के लिए व्यापक समर्थन प्रदान किया है। महिला एवं बाल विकास विभाग द्वारा स्व-सहायता समूहों को प्रशिक्षण, तकनीकी सहायता, आवश्यक मशीनरी जैसे मिक्सर, ग्राइंडर, पैकेजिंग उपकरण उपलब्ध कराई जा रही है। राज्य के विभिन्न जिलों में, जैसे बस्तर, सरगुजा, दुर्ग, रायपुर और बिलासपुर, कई आधुनिक उत्पादन इकाइयां स्थापित की गई हैं, जहाँ महिलाएं अद्यतन उपकरणों का उपयोग कर बड़े पैमाने पर उत्पादन कर रही हैं। सरकार यह सुनिश्चित कर रही है कि इन समूहों को कच्चे माल की नियमित आपूर्ति मिले और उनके उत्पादों को उचित बाजार मिल सके, जिससे उनकी आय में स्थिरता बनी रहे। इस कार्यक्रम ने महिलाओं को परिवार के भीतर और समाज में भी अधिक सम्मान और निर्णय लेने की शक्ति प्रदान की है। अब वे अपने बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और परिवार की अन्य महत्वपूर्ण वित्तीय योजनाओं में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं। भविष्य में, इस मॉडल को हस्तशिल्प और स्थानीय कृषि उत्पादों के उत्पादन व विपणन तक विस्तारित करने की योजना है, जिससे अधिक महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाया जा सके और छत्तीसगढ़ की ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके।

उत्पाद लोड हो रहे हैं…

टैग्स

और पढ़ें

लेखक
Dipti Das
दिप्ति दास साकार भारत की रिपोर्टर हैं। वे छत्तीसगढ़ और देश की ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज और जनहित के विषयों पर रिपोर्ट करती हैं।

आपकी प्रतिक्रिया