वास्तु गुरु राणा सिकंदर के अनुसार, रथ की रस्सी केवल एक साधारण डोरी नहीं, बल्कि भक्त और भगवान के बीच आस्था का प्रतीक है।
इसे खींचना जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, विनम्रता और सेवा भाव को अपनाने का संदेश देता है।
उनका कहना है कि जब व्यक्ति अहंकार छोड़कर भगवान की सेवा में सहभागी बनता है, तब उसके जीवन में मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खुलता है।पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान जगन्नाथ वर्ष में एक बार अपने भक्तों के बीच नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं।
इस दौरान रथ को आगे बढ़ाने में भाग लेना ईश्वर की सेवा का अवसर माना जाता है।