वास्तु गुरु राणा सिकंदर: जानें जगन्नाथ रथयात्रा में रस्सी खींचने का रहस्य
वास्तु गुरु राणा सिकंदर के अनुसार, रथ की रस्सी केवल एक साधारण डोरी नहीं, बल्कि भक्त और भगवान के बीच आस्था का प्रतीक है। इसे खींचना जीवन में सकारात्मक ऊर्जा, विनम्रता और सेवा भाव को अपनाने का संदेश देता है। उनका कहना है कि जब व्यक्ति अहंकार छोड़कर भगवान की सेवा में सहभागी बनता है, तब उसके जीवन में मानसिक शांति और आध्यात्मिक उन्नति का मार्ग खुलता है।
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, भगवान जगन्नाथ वर्ष में एक बार अपने भक्तों के बीच नगर भ्रमण के लिए निकलते हैं। इस दौरान रथ को आगे बढ़ाने में भाग लेना ईश्वर की सेवा का अवसर माना जाता है। कई श्रद्धालु इसे अपने जीवन के सबसे बड़े धार्मिक अनुभवों में शामिल करते हैं।
रथयात्रा का एक महत्वपूर्ण संदेश समानता का भी है। इस उत्सव में किसी भी जाति, वर्ग या सामाजिक स्थिति का भेदभाव नहीं रहता। सभी श्रद्धालु एक साथ भगवान के रथ को खींचते हैं, जो समाज में एकता, प्रेम और भाईचारे का प्रतीक है।
वास्तु गुरु राणा सिकंदर का मानना है कि यदि किसी कारणवश रथ की रस्सी खींचने का अवसर न मिले, तो भी श्रद्धापूर्वक भगवान का स्मरण, दर्शन, भजन और सेवा भाव समान रूप से पुण्यदायी हैं। सच्ची भक्ति मन की पवित्रता, सकारात्मक सोच और धर्म के मार्ग पर चलने में निहित है।
जगन्नाथ रथयात्रा हमें यह सीख देती है कि जब हम अपने जीवन की डोर भगवान को सौंपकर धर्म, सेवा और सदाचार के मार्ग पर चलते हैं, तब जीवन की यात्रा अधिक सरल, सफल और मंगलमय बन जाती है।