भारत के हृदय कहे जाने वाले राज्य छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में स्थित घोटिया गांव, अपनी एक अनूठी और सदियों पुरानी परंपरा के लिए जाना जाता है।
जहां पूरा देश उत्साह और उमंग के साथ कार्तिक मास की अमावस्या को दीपावली का महापर्व मनाता है, वहीं इस आदिवासी बहुल गांव के निवासी ठीक एक सप्ताह पहले ही रोशनी के इस त्योहार को मना लेते हैं।
इस असाधारण रिवाज के पीछे गांव के आराध्य देव, सिरदार देव, का एक अलौकिक आदेश और ग्रामीणों की अटूट आस्था है।
यह परंपरा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि घोटिया गांव की पहचान, उसकी संस्कृति और उसके सामूहिक जीवन का अभिन्न अंग बन चुकी है, जिसे पीढ़ियों से पूरी निष्ठा के साथ निभाया जा रहा है।परंपरा का आधार और सिरदार देव की महिमाघोटिया गांव में दिवाली को देश से एक सप्ताह पहले मनाने की यह परंपरा लगभग 200 वर्षों से अधिक पुरानी बताई जाती है।