छत्तीसगढ़: घोटिया गांव में दिवाली एक सप्ताह पहले, सिरदार देव का आदेश
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भारत के हृदय कहे जाने वाले राज्य छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में स्थित घोटिया गांव, अपनी एक अनूठी और सदियों पुरानी परंपरा के लिए जाना जाता है। जहां पूरा देश उत्साह और उमंग के साथ कार्तिक मास की अमावस्या को दीपावली का महापर्व मनाता है, वहीं इस आदिवासी बहुल गांव के निवासी ठीक एक सप्ताह पहले ही रोशनी के इस त्योहार को मना लेते हैं। इस असाधारण रिवाज के पीछे गांव के आराध्य देव, सिरदार देव, का एक अलौकिक आदेश और ग्रामीणों की अटूट आस्था है। यह परंपरा केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि घोटिया गांव की पहचान, उसकी संस्कृति और उसके सामूहिक जीवन का अभिन्न अंग बन चुकी है, जिसे पीढ़ियों से पूरी निष्ठा के साथ निभाया जा रहा है।
परंपरा का आधार और सिरदार देव की महिमा
घोटिया गांव में दिवाली को देश से एक सप्ताह पहले मनाने की यह परंपरा लगभग 200 वर्षों से अधिक पुरानी बताई जाती है। ग्रामीणों का मानना है कि उनके ग्राम देवता, सिरदार देव, ने उन्हें यह आदेश दिया था कि यदि वे पारंपरिक तिथि पर दिवाली मनाएंगे, तो गांव पर विपत्ति आएगी और उन्हें देव कोप का सामना करना पड़ेगा। सिरदार देव को गांव का संरक्षक और हर संकट का निवारक माना जाता है। ग्रामीणों के अनुसार, अतीत में कई बार ऐसा हुआ है जब किसी ने इस आदेश का उल्लंघन किया, तो गांव में अचानक बीमारियां फैल गईं या फसलें नष्ट हो गईं। इन घटनाओं ने ग्रामीणों की आस्था को और मजबूत कर दिया है। इसी कारण, घोटिया गांव के लोग कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी से ठीक एक सप्ताह पहले, यानी लगभग कार्तिक कृष्ण सप्तमी या अष्टमी के आसपास, अपनी दिवाली मनाते हैं। यह केवल एक अंधविश्वास नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही एक गहरी धार्मिक भावना और प्राकृतिक शक्तियों के प्रति सम्मान का प्रतीक है। गांव के पुजारी और बुजुर्ग इस बात पर जोर देते हैं कि सिरदार देव की आज्ञा का पालन ही उनकी खुशहाली का मार्ग है।
दिवाली की अनोखी तारीख और तैयारियां
जब देशभर में दिवाली की तैयारियां शुरू भी नहीं होतीं, घोटिया गांव में दिवाली का उत्साह चरम पर होता है। ग्रामीण पारंपरिक तिथि से एक सप्ताह पहले ही अपने घरों की साफ
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