देशभर में शिक्षा के अधिकार कानून यानी Right to Education Act (RTE) के तहत होने वाले एडमिशन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है।
कई राज्यों में निजी स्कूलों ने सरकार की नीतियों और भुगतान संबंधी मुद्दों के विरोध में बंद का ऐलान कर दिया है।
इस फैसले से लाखों छात्रों और अभिभावकों के सामने अनिश्चितता की स्थिति पैदा हो गई है।क्या है पूरा मामला?RTE के तहत निजी स्कूलों को आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) और वंचित समूहों के बच्चों के लिए 25% सीटें आरक्षित करनी होती हैं।
सरकार इन छात्रों की फीस का भुगतान करती है।