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कोरबा में 9 हाथियों का दल सक्रिय, लबेद में ड्रोन से निगरानी

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कोरबा में 9 हाथियों का दल सक्रिय, लबेद में ड्रोन से निगरानी
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कोरबा जिले में 9 हाथियों का एक दल पिछले कुछ दिनों से सक्रिय है, जिसने चचिया-चिकनीपाली क्षेत्रों से होते हुए अब लबेद गांव के आसपास अपनी मौजूदगी दर्ज कराई है। हाथियों के इस दल के लगातार रिहायशी इलाकों के करीब पहुंचने से ग्रामीणों में भारी दहशत का माहौल है। वन विभाग ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए हाथियों की गतिविधियों पर पैनी नजर रखने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल शुरू कर दिया है। यह कदम मानव-हाथी संघर्ष को रोकने और जानमाल के नुकसान को कम करने के उद्देश्य से उठाया गया है, क्योंकि भोजन और पानी की तलाश में हाथियों का आबादी वाले क्षेत्रों में प्रवेश करना एक गंभीर चुनौती बन गया है।

हाथियों की मौजूदा स्थिति और वन विभाग की चुनौतियां

कोरबा वनमंडल के तहत आने वाले इन क्षेत्रों में 9 हाथियों का यह दल पिछले कई दिनों से सक्रिय है। शुरुआत में इस दल को चचिया और चिकनीपाली के जंगलों में देखा गया था, जहां उन्होंने कुछ किसानों की फसलों को नुकसान पहुंचाया। अब यह दल लबेद गांव के नजदीक पहुंच गया है, जिससे स्थानीय निवासियों की चिंताएं काफी बढ़ गई हैं। वन विभाग के अधिकारियों के अनुसार, हाथियों का यह दल मुख्यतः भोजन और जल स्रोतों की तलाश में एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में विचरण कर रहा है। विभाग के सामने सबसे बड़ी चुनौती हाथियों को आबादी वाले क्षेत्रों में प्रवेश करने से रोकना और उन्हें सुरक्षित रूप से जंगल के भीतर वापस धकेलना है। इस प्रक्रिया में ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करना भी एक महत्वपूर्ण पहलू है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि जंगल के सिकुड़ते दायरे और मानव बस्तियों के विस्तार के कारण ऐसे संघर्षों में वृद्धि हुई है।

ड्रोन निगरानी और सुरक्षा उपाय

वन विभाग ने हाथियों की सटीक लोकेशन और उनके मूवमेंट पैटर्न को ट्रैक करने के लिए अत्याधुनिक ड्रोन तकनीक का सहारा लिया है। ड्रोन की मदद से दिन और रात दोनों समय हाथियों के दल पर नजर रखी जा रही है, जिससे उनकी गतिविधियों का realtime अपडेट मिल रहा है। यह जानकारी तुरंत स्थानीय ग्रामीणों और वनकर्मियों तक पहुंचाई जाती है, ताकि वे सतर्क रह सकें और किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके। इसके अतिरिक्त, वन विभाग ने हाथी मित्र दल का गठन किया है, जो ग्रामीणों को हाथियों से बचाव के तरीके बता रहा है और उन्हें जागरूक कर रहा है। पटाखा फोड़कर या मशाल जलाकर हाथियों को दूर रखने के पारंपरिक तरीकों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है, लेकिन विभाग इस बात पर जोर दे रहा है कि ग्रामीण हाथियों के करीब न जाएं और उन्हें उत्तेजित न करें। कोरबा के डिवीजनल फॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) श्री अनिल साहू ने बताया कि विभाग चौबीसों घंटे निगरानी कर रहा है और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए तैयार है।

मानव-हाथी संघर्ष का बढ़ता खतरा और दीर्घकालिक समाधान

कोरबा जिला छत्तीसगढ़ के उन क्षेत्रों में से एक है जहां मानव-हाथी संघर्ष की घटनाएं आम हो गई हैं। पिछले पांच वर्षों में जिले में हाथियों के हमलों से कई लोगों की जान गई है और भारी मात्रा में फसलों का नुकसान हुआ है। इस समस्या की जड़ में जंगलों का कटाव, कोयला खनन जैसी औद्योगिक गतिविधियां और हाथियों के पारंपरिक गलियारों का अतिक्रमण मुख्य कारण हैं। ये कारक हाथियों को उनके प्राकृतिक आवास से दूर धकेल कर मानव बस्तियों की ओर आने पर मजबूर कर रहे हैं। वन विभाग और प्रशासन दीर्घकालिक समाधानों पर भी विचार कर रहा है, जिसमें हाथियों के लिए विशेष गलियारों का निर्माण, उनके प्राकृतिक आवासों का संरक्षण और जल स्रोतों का विकास शामिल है ताकि उन्हें जंगल के भीतर ही भोजन और पानी मिल सके। सौर ऊर्जा से चलने वाली बाड़ और अन्य गैर-घातक बाधाएं भी कुछ क्षेत्रों में सफलतापूर्वक स्थापित की गई हैं, जो हाथियों को खेतों और गांवों से दूर रखने में मदद करती हैं।

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वन विभाग ग्रामीणों से लगातार सहयोग की अपील कर रहा है और उन्हें सलाह दे रहा है कि वे हाथियों के दल से सुरक्षित दूरी बनाए रखें। प्रशासन ने यह भी सुनिश्चित किया है कि फसल क्षति और जानमाल के नुकसान की स्थिति में पीड़ितों को नियमानुसार मुआवजा प्रदान किया जाएगा। वर्तमान में 9 हाथियों के इस दल पर सघन निगरानी जारी है और उम्मीद है कि वन विभाग की रणनीति से उन्हें सुरक्षित रूप से जंगल के गहरे हिस्सों में वापस धकेला जा सकेगा, जिससे मानव और वन्यजीव दोनों के लिए शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व सुनिश्चित हो सके। यह चुनौती केवल कोरबा की नहीं, बल्कि पूरे राज्य की है, जिसके लिए एकीकृत और स्थायी समाधानों की आवश्यकता है।

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लेखक
Dipti Das
दिप्ति दास साकार भारत की रिपोर्टर हैं। वे छत्तीसगढ़ और देश की ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज और जनहित के विषयों पर रिपोर्ट करती हैं।

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