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छत्तीसगढ़ में तेंदुए का खूनी आतंक: 7 घायल, ड्रोन से तलाश जारी

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छत्तीसगढ़ में तेंदुए का खूनी आतंक: 7 घायल, ड्रोन से तलाश जारी
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छत्तीसगढ़ के धमतरी और कोंडागांव जिलों में पिछले कुछ दिनों से एक खूंखार तेंदुए ने भारी आतंक मचा रखा है, जिसके परिणामस्वरूप दोनों जिलों के विभिन्न गांवों में सात ग्रामीण गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। इन घटनाओं के बाद वन विभाग ने तेंदुए को पकड़ने के लिए बड़े पैमाने पर अभियान शुरू किया है, जिसमें आधुनिक ड्रोन कैमरों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। ग्रामीणों में गहरा भय व्याप्त है और उन्हें सतर्क रहने की अपील की गई है क्योंकि यह तेंदुआ अचानक हमला कर रहा है और तेजी से गायब हो रहा है, जिससे क्षेत्र में अशांति का माहौल बन गया है। यह स्थिति न केवल स्थानीय लोगों के लिए चिंता का विषय बन गई है, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और मानव-वन्यजीव संघर्ष के प्रबंधन पर भी गंभीर सवाल उठा रही है। वन विभाग के अधिकारी लगातार गश्त कर रहे हैं और स्थानीय पुलिस की मदद से भी स्थिति पर नजर रखी जा रही है ताकि कोई अप्रिय घटना न हो।

आतंक का खौफनाक मंजर और घायलों की स्थिति

तेंदुए के हमलों की शुरुआत धमतरी जिले के सिहावा वन परिक्षेत्र से हुई, जहाँ डोकाल गांव के पास रामलाल (55 वर्ष) अपने खेत में काम कर रहे थे तभी तेंदुए ने उन पर हमला कर दिया। तेंदुए ने रामलाल के सिर और गर्दन पर गहरे घाव किए, लेकिन किसी तरह वह बच निकलने में कामयाब रहे। इसके बाद कोंडागांव जिले के केशकाल वनमंडल के फरसगांव क्षेत्र में भी ऐसी ही तीन घटनाएं सामने आईं, जहाँ अलग-अलग समय पर सोनिया बाई (40 वर्ष), मोहन (32 वर्ष) और सुरेश (48 वर्ष) पर हमला हुआ। इन सभी पीड़ितों को हाथों, पैरों और पीठ पर गंभीर चोटें आई हैं। एक अन्य घटना में, धमतरी के ही एक गांव में तीन बच्चों पर हमला हुआ, जब वे शाम को खेल रहे थे। गनीमत रही कि उनके माता-पिता ने शोर मचाकर तेंदुए को भगा दिया, जिससे वे मामूली चोटों के साथ बच गए। सभी घायलों को तत्काल निकटतम प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया, जहाँ से उन्हें धमतरी जिला अस्पताल और कोंडागांव जिला अस्पताल में बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया गया है। डॉक्टरों के अनुसार, सभी घायलों की स्थिति स्थिर है, लेकिन उन्हें गहन निगरानी में रखा गया है। इन लगातार हमलों ने पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल पैदा कर दिया है, जिससे ग्रामीण अपने घरों से बाहर निकलने में भी डर रहे हैं।

वन विभाग की चुनौती और ड्रोन अभियान

तेंदुए के इस लगातार आतंक के मद्देनजर वन विभाग ने युद्धस्तर पर अभियान छेड़ दिया है। धमतरी वनमंडल अधिकारी श्री संजय शुक्ला ने बताया कि तेंदुए की तलाश के लिए चार अलग-अलग टीमें गठित की गई हैं। इन टीमों में विशेषज्ञ वनकर्मी, ट्रैकर और वन्यजीव विशेषज्ञ शामिल हैं। तेंदुए के पदचिन्हों और उसके संभावित ठिकानों की पहचान के लिए सघन वन क्षेत्रों में तलाशी अभियान चलाया जा रहा है। इस अभियान में आधुनिक तकनीक का भी सहारा लिया जा रहा है, जिसमें उच्च-रिजॉल्यूशन वाले ड्रोन कैमरों का उपयोग शामिल है। ये ड्रोन रात में भी थर्मल इमेजिंग की मदद से तेंदुए का पता लगाने में सक्षम हैं, जिससे उसकी सटीक लोकेशन का पता लगाया जा सके। वन विभाग ने चार पिंजरे भी लगाए हैं, जिनमें बकरियों को चारे के रूप में रखा गया है, ताकि तेंदुए को फंसाया जा सके। इसके अलावा, विभाग ने स्थानीय ग्रामीणों से भी अपील की है कि वे किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना तत्काल वन विभाग या पुलिस को दें। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यह तेंदुआ शायद अपने प्राकृतिक आवास से भटक गया है या भोजन की तलाश में आबादी वाले क्षेत्रों में आ गया है।

ग्रामीणों में दहशत और बचाव के उपाय

तेंदुए के लगातार हमलों ने ग्रामीणों के दैनिक जीवन को बुरी तरह प्रभावित किया है। किसान खेतों में जाने से डर रहे हैं, महिलाएं जंगल से जलाऊ लकड़ी या चारा लाने से कतरा रही हैं और बच्चे शाम को बाहर खेलने से परहेज कर रहे हैं। स्थानीय पंचायतें और प्रशासन भी ग्रामीणों को सतर्क रहने की सलाह दे रहे हैं। धमतरी जिला प्रशासन ने सभी स्कूलों को निर्देश दिए हैं कि वे बच्चों को स्कूल के समय के बाद अकेले घर न भेजें और अभिभावकों से भी अपील की है कि वे अपने बच्चों को शाम के समय घर से बाहर न निकलने दें। वन विभाग ने ग्रामीणों के लिए कुछ महत्वपूर्ण दिशानिर्देश जारी किए हैं:

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* शाम और सुबह के समय अकेले घर से बाहर न निकलें, खासकर जंगल के करीब वाले इलाकों में।

* जंगल में जाते समय समूह में रहें और शोर करते रहें ताकि वन्यजीवों को आपकी उपस्थिति का आभास हो।

* अपने मवेशियों को सुरक्षित बाड़ों में रखें, क्योंकि तेंदुए अक्सर आसान शिकार की तलाश में आते हैं।

* घरों के आसपास उचित रोशनी की व्यवस्था करें।

* किसी भी संदिग्ध जानवर या उसके पदचिन्हों को देखने पर तुरंत वन विभाग को सूचित करें।

वन विभाग ने यह भी घोषणा की है कि तेंदुए के हमले में घायल हुए लोगों को सरकार द्वारा निर्धारित मुआवजा राशि प्रदान की जाएगी।*

यह घटना मानव और वन्यजीवों के बीच बढ़ते संघर्ष की एक और कड़ी है, जो तेजी से सिकुड़ते वन्यजीव आवास और बढ़ती मानव आबादी के कारण उत्पन्न हो रही है। इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए दीर्घकालिक रणनीतियों की आवश्यकता है, जिसमें वन्यजीव गलियारों का संरक्षण और स्थानीय समुदायों को वन्यजीवों के साथ सह-अस्तित्व के लिए जागरूक करना शामिल है।

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लेखक
Dipti Das
दिप्ति दास साकार भारत की रिपोर्टर हैं। वे छत्तीसगढ़ और देश की ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज और जनहित के विषयों पर रिपोर्ट करती हैं।

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