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एमपी में मौसम का दोहरा मिजाज: दिन में तपिश, रात में गुलाबी ठंड; इंदौर में 13.4 डिग्री

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एमपी में मौसम का दोहरा मिजाज: दिन में तपिश, रात में गुलाबी ठंड; इंदौर में 13.4 डिग्री
मध्य प्रदेश

मध्य प्रदेश में इन दिनों मौसम का एक अनोखा और दोहरा मिजाज देखने को मिल रहा है, जहाँ दिन के समय हल्की गर्मी या तपिश का एहसास होता है, वहीं रात होते ही गुलाबी ठंडक अपना असर दिखाना शुरू कर देती है। राज्य के प्रमुख शहरों में से एक इंदौर में तो न्यूनतम तापमान लुढ़ककर 13.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया है, जो इस बदलते मौसम की स्पष्ट तस्वीर पेश करता है। मौसम विभाग ने पश्चिमी विक्षोभों की सक्रियता में कमी और हवाओं के रुख में परिवर्तन को इस स्थिति का प्रमुख कारण बताया है, जिसका अनुभव राज्यभर के नागरिक कर रहे हैं और यह स्थिति अगले कुछ दिनों तक बनी रहने की संभावना है।

इंदौर का मौसम और अन्य शहरों का हाल

मध्य प्रदेश की आर्थिक राजधानी इंदौर में मौसम ने करवट ली है, जहाँ रात का पारा 13.4 डिग्री सेल्सियस तक पहुँच गया है, जिससे रात और सुबह के समय अच्छी खासी ठंड महसूस हो रही है। हालांकि, दिन के समय सूर्य की किरणें चुभन भरी नहीं हैं, लेकिन फिर भी हल्की गर्मी बनी रहती है, जिससे दिन का अधिकतम तापमान 29 से 30 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा रहा है। यह स्थिति दिन और रात के तापमान में लगभग 15 डिग्री सेल्सियस का अंतर पैदा कर रही है, जो लोगों को दिन में हल्के कपड़े और रात में गर्म कपड़े पहनने पर मजबूर कर रही है।

केवल इंदौर ही नहीं, बल्कि राज्य के अन्य प्रमुख शहरों जैसे भोपाल, जबलपुर, और ग्वालियर में भी इसी तरह का मौसम देखने को मिल रहा है। भोपाल में न्यूनतम तापमान 15 डिग्री सेल्सियस के आसपास बना हुआ है, जबकि जबलपुर और ग्वालियर में भी पारा 14 से 16 डिग्री सेल्सियस के बीच दर्ज किया जा रहा है। इन सभी शहरों में अधिकतम तापमान 28 से 31 डिग्री सेल्सियस के बीच बना हुआ है। सुबह के समय हल्की धुंध और ओस की बूंदें भी अब आम हो गई हैं, जो इस बात का संकेत है कि सर्दियाँ धीरे-धीरे अपनी पकड़ मजबूत कर रही हैं। मौसम विभाग के अनुसार, यह बदलाव सामान्य मौसमी चक्र का हिस्सा है, लेकिन इस साल यह थोड़ा पहले महसूस किया जा रहा है।

मौसम के इस दोहरे मिजाज का कारण

मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मध्य प्रदेश में मौसम के इस दोहरे मिजाज का प्रमुख कारण उत्तरी और उत्तर-पश्चिमी हवाओं का सक्रिय होना है, साथ ही पश्चिमी विक्षोभों की सक्रियता में कमी भी एक महत्वपूर्ण कारक है। वर्तमान में कोई मजबूत पश्चिमी विक्षोभ उत्तर भारत को प्रभावित नहीं कर रहा है, जिसके कारण हिमालय से आने वाली सर्द हवाएं बिना किसी बाधा के मैदानी इलाकों तक पहुँच रही हैं। ये हवाएं रात के समय तापमान को तेजी से गिराती हैं।

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इसके अलावा, आसमान का साफ होना भी इस स्थिति में योगदान दे रहा है। जब आसमान साफ होता है और बादल नहीं होते, तो दिन में सूर्य की किरणें सीधे धरती पर आती हैं, जिससे सतह गर्म होती है और तापमान बढ़ता है। वहीं, रात के समय धरती से निकली गर्मी का विकिरण (रेडिएशन) तेजी से अंतरिक्ष में लौट जाता है, क्योंकि बादलों की अनुपस्थिति में कोई अवरोध नहीं होता, जिससे रात का तापमान तेजी से गिरता है। यही कारण है कि दिन और रात के तापमान में इतना बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है। विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति आमतौर पर नवंबर के मध्य या अंत में शुरू होती है, लेकिन इस साल यह अक्टूबर के अंत और नवंबर की शुरुआत में ही महसूस की जा रही है, जो जलवायु परिवर्तन के सूक्ष्म प्रभावों का भी संकेत हो सकता है।

आगामी दिनों का पूर्वानुमान और जनजीवन पर असर

मौसम विभाग के पूर्वानुमान के अनुसार, मध्य प्रदेश में अगले कुछ दिनों तक मौसम का यह दोहरा मिजाज बना रहेगा। न्यूनतम तापमान में और गिरावट आने की संभावना है, विशेषकर रात के समय ठंडक और बढ़ेगी। दिन में धूप खिली रहेगी, लेकिन उसकी तीव्रता धीरे-धीरे कम होती जाएगी। दिसंबर की शुरुआत तक राज्य के अधिकांश हिस्सों में न्यूनतम तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे आने की उम्मीद है, जिससे कड़ाके की सर्दी का अनुभव होगा।

इस बदलते मौसम का जनजीवन पर भी असर दिखना शुरू हो गया है। लोगों ने अपने गर्म कपड़े निकालना शुरू कर दिए हैं और सुबह-शाम सैर पर निकलने वाले लोग शॉल, जैकेट और स्वेटर का इस्तेमाल कर रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बदलते मौसम में सर्दी-जुकाम, खांसी और वायरल संक्रमण से बचाव के लिए सावधानी बरतने की सलाह दी है, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों को। उन्हें ठंड से बचने और गर्म कपड़े पहनने की सलाह दी गई है। किसानों के लिए, रबी की फसलों जैसे गेहूं, चना और सरसों के लिए यह मौसम काफी अनुकूल माना जा रहा है, क्योंकि ठंडक इन फसलों के विकास में सहायक होती है। हालांकि, अत्यधिक ओस या पाला पड़ने की स्थिति में कुछ सब्जियों और अन्य फसलों को नुकसान भी हो सकता है, जिसके लिए किसानों को मौसम की लगातार निगरानी करने और आवश्यक उपाय करने की सलाह दी गई है। कुल मिलाकर, मध्य प्रदेश अब पूरी तरह से सर्दियों के स्वागत के लिए तैयार है।

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लेखक
Dipti Das
दिप्ति दास साकार भारत की रिपोर्टर हैं। वे छत्तीसगढ़ और देश की ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज और जनहित के विषयों पर रिपोर्ट करती हैं।

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