मिडिल ईस्ट में रहस्यमयी हलचल: अमेरिकी एयर फोर्स के विमान अचानक रडार से गायब
मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक नया घटनाक्रम सामने आया है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। हाल ही में ऐसी खबरें सामने आई हैं कि अमेरिकी सैन्य विमानों की गतिविधियां अचानक कम हो गई हैं और कुछ एयरक्राफ्ट फ्लाइट ट्रैकिंग सिस्टम से गायब हो गए। इस घटनाक्रम के बाद सोशल मीडिया और अंतरराष्ट्रीय मीडिया में कई तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले 24 घंटों में मिडिल ईस्ट और यूरोप के ऊपर अमेरिकी सैन्य विमानों की संख्या में भारी गिरावट देखी गई। फ्लाइट ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म Flightradar24 के आंकड़ों के अनुसार, पहले जहां 27 से अधिक अमेरिकी सैन्य विमान सक्रिय दिखाई दे रहे थे, वहीं अब यह संख्या घटकर केवल 7 रह गई है।
इन विमानों में मुख्य रूप से अमेरिकी एयर फोर्स के KC-135 Stratotanker और C-17 जैसे रिफ्यूलिंग और ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट शामिल बताए जा रहे हैं। ये विमान आमतौर पर सैन्य ऑपरेशन और फाइटर जेट्स को हवा में ईंधन पहुंचाने के लिए उपयोग किए जाते हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा उस वक्त शुरू हुई जब एक अमेरिकी KC-135 Stratotanker विमान ने पर्शियन गल्फ के ऊपर “7700” इमरजेंसी सिग्नल प्रसारित किया और उसके कुछ समय बाद वह रडार से गायब हो गया। अंतरराष्ट्रीय एविएशन नियमों के अनुसार “7700” को गंभीर आपातकालीन स्थिति का संकेत माना जाता है।
बताया जा रहा है कि यह विमान कतर की ओर जा रहा था और होर्मुज जलडमरूमध्य के पास उड़ान भर रहा था। इसके बाद क्षेत्र में GPS जामिंग और इलेक्ट्रॉनिक व्यवधान की खबरें भी सामने आईं। हालांकि अब तक अमेरिकी रक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।
इसी बीच ईरानी मीडिया और कुछ अंतरराष्ट्रीय प्लेटफॉर्म्स पर यह दावा भी किया गया कि अमेरिका ने अपनी सैन्य उड़ानों को अस्थायी रूप से रोक दिया है। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो पाई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम क्षेत्र में बढ़ते सैन्य खतरे और संभावित हमलों को देखते हुए उठाया गया हो सकता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी हाल ही में “Project Freedom” नामक अभियान को होर्मुज जलडमरूमध्य में रोकने की बात कही थी। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान के साथ एक “अंतिम समझौते” की दिशा में बातचीत चल रही है। इसके बाद से अमेरिकी सैन्य गतिविधियों में कमी देखी गई।
रक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि यदि अमेरिकी रिफ्यूलिंग विमान वास्तव में लापता हुए हैं तो यह अमेरिका के लिए बड़ा रणनीतिक झटका हो सकता है। KC-135 जैसे विमान अमेरिकी एयर ऑपरेशन की रीढ़ माने जाते हैं, क्योंकि इनके जरिए लड़ाकू विमानों को लंबी दूरी तक उड़ान भरने में मदद मिलती है।
इससे पहले भी 2026 में ईरान और अमेरिका के बीच तनाव के दौरान कई सैन्य विमान हादसों और संघर्षों की खबरें सामने आ चुकी हैं। मार्च 2026 में पश्चिमी इराक के ऊपर दो अमेरिकी KC-135 विमानों की टक्कर हो गई थी, जिसमें एक विमान क्रैश हो गया था। वहीं अप्रैल में अमेरिकी F-15E फाइटर जेट के गिरने और उसके बाद बड़े रेस्क्यू ऑपरेशन की खबरें भी आई थीं।
विश्लेषकों का मानना है कि मिडिल ईस्ट में मौजूदा हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्गों में से एक माना जाता है और यहां किसी भी सैन्य तनाव का असर वैश्विक तेल बाजार पर पड़ सकता है।
हालांकि अभी तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि गायब हुए अमेरिकी विमानों के साथ वास्तव में क्या हुआ। अमेरिकी सेंट्रल कमांड और पेंटागन की ओर से आधिकारिक बयान का इंतजार किया जा रहा है। लेकिन इस पूरे घटनाक्रम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता जरूर बढ़ा दी है और दुनिया की नजरें अब मिडिल ईस्ट की स्थिति पर टिकी हुई हैं।
और पढ़ें
- ब्रेकिंग न्यूज़ न्यूज़
- ताज़ा खबरें
- पश्चिम एशिया: ट्रंप के शांति दावे बेअसर, ईरान ने अमेरिका को दी चेतावनी
- अमेरिकी सांसद की चेतावनी: वीजा देरी से US में डॉक्टर संकट, भारतीयों पर असर
- इबोला प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों के लिए डीजीएचएस का परामर्श
- ईरान: पेजेशकियन का US से वार्ता पर बयान, अधिकारों की रक्षा पर जोर