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बिहार जनगणना 2026: 10 जनवरी से शुरुआत, जानिए विस्तृत शेड्यूल व नियम

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बिहार जनगणना 2026: 10 जनवरी से शुरुआत, जानिए विस्तृत शेड्यूल व नियम
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बिहार राज्य में बहुप्रतीक्षित जनगणना 2026 की व्यापक तैयारियां अपने अंतिम चरण में हैं, जिसके तहत आगामी 10 जनवरी से पूरे राज्य में व्यक्तियों की विस्तृत गणना का कार्य आधिकारिक रूप से प्रारंभ होने जा रहा है। यह प्रक्रिया पहले चरण के मकान सूचीकरण के बाद अब दूसरे और अधिक गहन चरण में प्रवेश कर रही है, जिसमें नागरिकों से कुल 40 प्रश्न पूछे जाएंगे, प्रवासियों के ब्योरे को संग्रहित किया जाएगा और बेघर लोगों की भी विशेष रूप से गिनती की जाएगी। इस महत्वपूर्ण राष्ट्रीय अभ्यास के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए, राज्य सरकार ने एक अहम निर्णय लेते हुए बोर्ड परीक्षाओं का आयोजन 1 मार्च के बाद करने की घोषणा की है, ताकि जनगणना कर्मियों को पर्याप्त समय और संसाधन मिल सकें। यह जनगणना राज्य के भविष्य के विकास, नीतियों के निर्माण और संसाधनों के प्रभावी वितरण के लिए महत्वपूर्ण आंकड़े उपलब्ध कराएगी।

जनगणना के मुख्य चरण और विस्तृत तिथियां

राज्य में जनगणना का कार्य अत्यंत व्यवस्थित और चरणबद्ध तरीके से पूरा किया जाएगा ताकि सटीक और विश्वसनीय आंकड़े जुटाए जा सकें। इस प्रक्रिया को कई महत्वपूर्ण चरणों में विभाजित किया गया है, जिनमें नागरिकों की सहभागिता के लिए स्व-गणना का विकल्प भी शामिल है। जनगणना की शुरुआत 10 जनवरी से होगी और पहले 15 दिनों तक, यानी 10 से 24 जनवरी तक, नागरिकों को ऑनलाइन माध्यम से अपनी जानकारी स्वयं दर्ज करने का अवसर मिलेगा। इस स्व-गणना के सफल समापन पर, प्रत्येक नागरिक को एक विशिष्ट 12 अंकों की संदर्भ संख्या प्रदान की जाएगी, जिसका उपयोग उनके द्वारा दर्ज किए गए आंकड़ों के सत्यापन के लिए किया जाएगा। यह पहल डिजिटल इंडिया के अनुरूप है और नागरिकों को प्रक्रिया में सक्रिय रूप से भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करती है।

स्व-गणना के इस प्रारंभिक चरण के बाद, जनगणना का मुख्य और सबसे व्यापक चरण 25 जनवरी से शुरू होगा और 28 फरवरी तक चलेगा। इस अवधि के दौरान, प्रशिक्षित प्रगणक घर-घर जाकर नागरिकों से सीधे संपर्क करेंगे, आवश्यक जानकारी जुटाएंगे और स्व-गणना के माध्यम से प्राप्त आंकड़ों का सत्यापन करेंगे। यह चरण आंकड़ों की सटीकता और व्यापकता सुनिश्चित करने के लिए महत्वपूर्ण है। इसके अतिरिक्त, एक विशेष प्रावधान के तहत, बेघर लोगों की गिनती के लिए 28 फरवरी की तिथि निर्धारित की गई है। यह गिनती विशेष रूप से शाम 6 बजे से रात 12 बजे के बीच की जाएगी, और इनके ठहरने के स्थानों को प्रखंड और नगर अधिकारियों द्वारा पहले से ही चिन्हित किया जाएगा ताकि कोई भी व्यक्ति गिनती से छूटे नहीं। इन सभी चरणों के पूर्ण होने के बाद, 1 से 5 मार्च तक आंकड़ों के पुनरीक्षण का कार्य चलेगा, जिसमें किसी भी संभावित त्रुटि या विसंगति को सुधारा जाएगा।

जनगणना के नए आयाम: प्रवासी, बेघर और 40 सवाल

इस बार की बिहार जनगणना में कई नए और महत्वपूर्ण आयामों को शामिल किया गया है, जो राज्य की सामाजिक-आर्थिक स्थिति की अधिक विस्तृत और सटीक तस्वीर प्रस्तुत करेंगे। जनगणना में प्रवासियों के ब्योरे को एकत्रित करने पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य राज्य से बाहर गए और राज्य में आए प्रवासियों की संख्या, उनके प्रवास के कारणों और उनके जीवन स्तर से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारी जुटाना है। यह डेटा प्रवासी श्रमिकों और उनके परिवारों के लिए बेहतर नीतियां बनाने में सहायक होगा। इसी प्रकार, बेघर लोगों की गिनती भी एक महत्वपूर्ण कदम है, जो समाज के सबसे वंचित वर्ग को मुख्यधारा में लाने और उनके लिए उपयुक्त आवास और कल्याणकारी योजनाएं बनाने में मदद करेगा।

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जनगणना प्रक्रिया के तहत नागरिकों से कुल 40 विस्तृत प्रश्न पूछे जाएंगे। इन प्रश्नों में जनसांख्यिकीय जानकारी जैसे आयु, लिंग, शिक्षा का स्तर, वैवाहिक स्थिति, व्यवसाय, आय के स्रोत, धर्म और जाति के साथ-साथ परिवार के सदस्यों की संख्या, घर की स्थिति, शौचालय की उपलब्धता, पेयजल स्रोत और अन्य आवश्यक सुविधाएं शामिल होंगी। इन विस्तृत 40 सवालों के माध्यम से एकत्रित किए गए आंकड़े राज्य के विभिन्न क्षेत्रों में विकास की स्थिति का आकलन करने, वंचित समुदायों की पहचान करने और लक्षित कल्याणकारी कार्यक्रमों को डिजाइन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। यह जानकारी सरकार को शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में ठोस निर्णय लेने में सक्षम बनाएगी। महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने इस प्रक्रिया की महत्ता पर जोर देते हुए कहा कि यह सटीक डेटा ही प्रभावी शासन का आधार बनेगा।

बोर्ड परीक्षाओं पर प्रभाव और सुचारू संचालन की चुनौती

जनगणना 2026 के सुचारू संचालन को सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार और जनगणना अधिकारियों ने मिलकर एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिसका सीधा प्रभाव राज्य में होने वाली बोर्ड परीक्षाओं पर पड़ेगा। महारजिस्ट्रार एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने स्पष्ट किया है कि जनगणना के कार्यों में किसी भी प्रकार की बाधा न आए, इसके लिए राज्य में 1 मार्च से पहले बोर्ड परीक्षाओं का आयोजन नहीं किया जाएगा। यह निर्णय इसलिए लिया गया है क्योंकि जनगणना के कार्य में बड़ी संख्या में शिक्षकों, सरकारी कर्मचारियों और अन्य प्रशिक्षित कर्मियों को लगाया जाता है, जो आमतौर पर परीक्षा ड्यूटी में भी शामिल होते हैं। यदि परीक्षाएं और जनगणना एक साथ होतीं, तो दोनों ही कार्यों में व्यवधान उत्पन्न हो सकता था।

यह कदम यह सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है कि जनगणना कर्मियों को अपना कार्य पूरी एकाग्रता और समयबद्धता के साथ करने का अवसर मिले। बोर्ड परीक्षाओं को 1 मार्च के बाद आयोजित करने से छात्रों को भी अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित करने के लिए पर्याप्त समय मिलेगा, और उन्हें जनगणना के कारण किसी भी तरह की शैक्षणिक बाधा का सामना नहीं करना पड़ेगा। यह समन्वय दर्शाता है कि राज्य सरकार जनगणना जैसे महत्वपूर्ण राष्ट्रीय कार्य को कितनी गंभीरता से ले रही है। जनगणना के सफल क्रियान्वयन के लिए शिक्षकों और अन्य सरकारी कर्मचारियों का सहयोग अपरिहार्य है, और परीक्षाओं के कार्यक्रम में बदलाव इस सहयोग को सुनिश्चित करने की दिशा में एक रणनीतिक कदम है।

बिहार के विकास में जनगणना का महत्व

बिहार की जनगणना 2026 केवल आंकड़ों का संग्रह मात्र नहीं है, बल्कि यह राज्य के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक ताने-बाने को समझने का एक महत्वपूर्ण उपकरण है। यह जनगणना राज्य के भविष्य के विकास पथ को निर्धारित करने में एक केंद्रीय भूमिका निभाएगी। एकत्रित किए गए सटीक और विस्तृत आंकड़े सरकार को गरीबी उन्मूलन, शिक्षा के स्तर में सुधार, स्वास्थ्य सेवाओं का विस्तार, रोजगार के अवसर पैदा करने और शहरी तथा ग्रामीण क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास के लिए प्रभावी योजनाएं बनाने में मदद करेंगे। उदाहरण के लिए, प्रवासियों और बेघर लोगों के बारे में विस्तृत जानकारी सरकार को इन संवेदनशील समूहों के लिए विशेष आवास योजनाएं, कौशल विकास कार्यक्रम और सामाजिक सुरक्षा जाल बनाने में सक्षम बनाएगी।

इसके अतिरिक्त, जाति, धर्म और भाषाई समूहों से संबंधित आंकड़े सामाजिक न्याय और समावेशी विकास की नीतियों को आकार देने के लिए महत्वपूर्ण होंगे। यह डेटा संसाधनों के न्यायसंगत वितरण और विभिन्न समुदायों की विशिष्ट आवश्यकताओं को पूरा करने में सहायता करेगा। जनगणना के माध्यम से प्राप्त जानकारी राज्य में जनसंख्या वृद्धि की दर, शहरीकरण के पैटर्न और जनसांख्यिकीय परिवर्तनों की प्रवृत्ति को समझने में भी सहायक होगी। यह दीर्घकालिक योजना और नीति निर्माण के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करेगी, जिससे बिहार एक अधिक समृद्ध और समतावादी समाज की ओर अग्रसर हो सकेगा। इस प्रकार, जनगणना 2026 सिर्फ एक प्रशासनिक कार्य नहीं, बल्कि बिहार के भविष्य की दिशा तय करने वाला एक मील का पत्थर साबित होगी।

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लेखक
Dipti Das
दिप्ति दास साकार भारत की रिपोर्टर हैं। वे छत्तीसगढ़ और देश की ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज और जनहित के विषयों पर रिपोर्ट करती हैं।

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