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जनहित क्रांति पार्टी पर प्रतिबंध 2027 तक बढ़ा, गृह विभाग ने जारी की अधिसूचना

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जनहित क्रांति पार्टी पर प्रतिबंध 2027 तक बढ़ा, गृह विभाग ने जारी की अधिसूचना
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छत्तीसगढ़ सरकार के गृह विभाग ने जनहित क्रांति पार्टी पर लगे प्रतिबंध को एक साल के लिए और बढ़ा दिया है। इस निर्णय के साथ, यह पार्टी अब 2027 तक गैरकानूनी संगठन बनी रहेगी। यह कार्रवाई रायपुर में राज्य प्रशासन द्वारा हाल ही में जारी एक अधिसूचना के माध्यम से की गई, जिसमें पार्टी की संदिग्ध और राष्ट्र-विरोधी गतिविधियों को राज्य की आंतरिक सुरक्षा और शांति व्यवस्था के लिए खतरा माना गया है। यह प्रतिबंध गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA), 1967 के तहत लगाया गया है, जिसका उद्देश्य ऐसे संगठनों को निष्क्रिय करना है जो देश की एकता, अखंडता और सुरक्षा को चुनौती देते हैं। गृह विभाग ने स्पष्ट किया है कि यह विस्तार पार्टी के लगातार आपत्तिजनक आचरण और उसके प्रभाव को देखते हुए किया गया है, ताकि राज्य में कानून-व्यवस्था बनी रहे।

प्रतिबंध की पृष्ठभूमि और कारण

जनहित क्रांति पार्टी पर यह प्रतिबंध पहली बार नहीं लगाया गया है। अतीत में भी इस संगठन पर नक्सलवाद से संबंध रखने और राज्य के खिलाफ हिंसा भड़काने की कोशिश करने के आरोप लगते रहे हैं। राज्य सरकार और केंद्रीय सुरक्षा एजेंसियों की रिपोर्टों के अनुसार, पार्टी के सदस्य गुप्त रूप से समाज के कमजोर वर्गों को भड़काने और उन्हें मुख्यधारा से अलग करने का प्रयास कर रहे थे। इन गतिविधियों में अवैध धन उगाही, हथियारों का प्रशिक्षण और सरकारी प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने की साजिशें शामिल थीं। गृह विभाग के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि पार्टी के कई प्रमुख सदस्यों पर गंभीर आपराधिक मुकदमे दर्ज हैं और वे लगातार सुरक्षा एजेंसियों की निगरानी में थे। ताजा समीक्षा के बाद, यह पाया गया कि पार्टी अभी भी अपनी विचारधारा और गतिविधियों को बदलने के लिए तैयार नहीं है, जिसके परिणामस्वरूप प्रतिबंध का विस्तार करना आवश्यक हो गया। सरकार का मानना है कि ऐसे संगठनों को सक्रिय रहने देने से राज्य में अशांति और अस्थिरता फैल सकती है, खासकर उन दूरदराज के इलाकों में जहां विकासात्मक परियोजनाएं चल रही हैं।

गृह विभाग की अधिसूचना और कानूनी प्रावधान

राज्य के गृह विभाग ने 16 जून, 2024 को एक विस्तृत अधिसूचना क्रमांक एफ 3-10/2024/गृह-2 जारी की, जिसमें जनहित क्रांति पार्टी को गैरकानूनी संगठन घोषित करने के निर्णय को एक और वर्ष के लिए बढ़ाने की घोषणा की गई। यह अधिसूचना गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम, 1967 की धारा 3(1) के तहत शक्तियों का प्रयोग करते हुए जारी की गई है। इस अधिनियम के तहत, केंद्र या राज्य सरकार किसी भी ऐसे संगठन को गैरकानूनी घोषित कर सकती है जो भारत की संप्रभुता और अखंडता के प्रतिकूल कार्य करता है, या जो सार्वजनिक व्यवस्था को बाधित करने का प्रयास करता है। प्रतिबंध के तहत, पार्टी के सभी कार्यालयों को बंद कर दिया जाता है, उसकी संपत्तियों को जब्त किया जा सकता है, और उसके सदस्यों को किसी भी सार्वजनिक गतिविधि या बैठक में भाग लेने की अनुमति नहीं होती है। अधिसूचना में स्पष्ट रूप से उल्लेख किया गया है कि यह कदम राज्य की आंतरिक सुरक्षा को मजबूत करने और नागरिकों के जीवन और संपत्ति की रक्षा के लिए उठाया गया है। यह कानूनी प्रावधान सरकार को ऐसे संगठनों पर नकेल कसने का अधिकार देता है जो कानून के शासन को कमजोर करने का प्रयास करते हैं।

प्रतिबंध का प्रभाव और भविष्य की चुनौतियाँ

जनहित क्रांति पार्टी पर प्रतिबंध के विस्तार से उसके कार्यकर्ताओं और समर्थकों की गतिविधियों पर सीधा असर पड़ेगा। पार्टी अब किसी भी प्रकार की सार्वजनिक सभा, रैली या प्रदर्शन आयोजित नहीं कर पाएगी। इसके अलावा, उसे किसी भी स्रोत से वित्तीय सहायता प्राप्त करने या जुटाने की अनुमति नहीं होगी, जिससे उसकी परिचालन क्षमता बुरी तरह प्रभावित होगी। सरकार का यह कदम राज्य में नक्सल विरोधी अभियानों और शांति बहाली के प्रयासों को और गति देगा। हालांकि, इस तरह के प्रतिबंध अक्सर पार्टी के भूमिगत होने और गुप्त रूप से अपनी गतिविधियों को जारी रखने की संभावना को भी जन्म देते हैं। सुरक्षा एजेंसियों के सामने अब यह चुनौती होगी कि वे प्रतिबंधित संगठन के बिखरे हुए नेटवर्क और उसके सहानुभूति रखने वालों पर कड़ी निगरानी रखें ताकि वे नए नामों या तरीकों से अपनी गैरकानूनी गतिविधियों को अंजाम न दे सकें। राज्य सरकार ने स्पष्ट किया है कि वह किसी भी कीमत पर कानून-व्यवस्था से समझौता नहीं करेगी और ऐसे सभी तत्वों से सख्ती से निपटेगी जो राज्य की शांति भंग करने का प्रयास करेंगे। यह निर्णय छत्तीसगढ़ में सुरक्षा और विकास के बीच संतुलन साधने की सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।

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सुरक्षा व्यवस्था और जनजीवन पर असर

इस प्रतिबंध के विस्तार का उद्देश्य राज्य के नागरिकों के लिए अधिक सुरक्षित और स्थिर वातावरण सुनिश्चित करना है। विशेष रूप से छत्तीसगढ़ के उन क्षेत्रों में जहां नक्सली हिंसा का इतिहास रहा है, ऐसे संगठनों पर सख्त कार्रवाई से स्थानीय लोगों में विश्वास बहाल होता है और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जुड़ने का अवसर मिलता है। सरकार की ओर से सुरक्षा बलों को और अधिक सतर्क रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके। पुलिस और खुफिया एजेंसियां जनहित क्रांति पार्टी के पूर्व सदस्यों और उनके संभावित नए ठिकानों पर अपनी नजर बनाए हुए हैं। यह कदम यह भी संदेश देता है कि राज्य सरकार आतंकवाद और उग्रवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपना रही है। उम्मीद है कि इस प्रतिबंध से राज्य में निवेश और पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा, क्योंकि एक सुरक्षित वातावरण व्यावसायिक गतिविधियों और सामान्य जनजीवन के लिए आवश्यक है। सरकार का अंतिम लक्ष्य 2027 तक राज्य को पूरी तरह से अशांति मुक्त बनाना है।

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लेखक
Dipti Das
दिप्ति दास साकार भारत की रिपोर्टर हैं। वे छत्तीसगढ़ और देश की ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज और जनहित के विषयों पर रिपोर्ट करती हैं।

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