छत्तीसगढ़ 7 मिनट पढ़ें

छत्तीसगढ़ में उमस से जनजीवन प्रभावित, अगले दो दिन राहत की उम्मीद कम

इस खबर की वेब स्टोरी देखें
9 व्यूज़
छत्तीसगढ़ में उमस से जनजीवन प्रभावित, अगले दो दिन राहत की उम्मीद कम
छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ के अधिकांश हिस्सों में पिछले एक सप्ताह से अधिक समय से भीषण उमस भरी गर्मी ने लोगों का जीना मुहाल कर दिया है। राजधानी रायपुर समेत दुर्ग, बिलासपुर, राजनांदगांव और महासमुंद जैसे मैदानी जिलों में अधिकतम तापमान सामान्य से ऊपर बना हुआ है, जिससे जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हुई है। मौसम विभाग ने बताया है कि अगले दो से तीन दिनों तक इस स्थिति में तत्काल कोई बड़ा बदलाव आने की संभावना नहीं है, जिससे प्रदेशवासियों को अभी और परेशानी झेलनी पड़ सकती है। इस असहज मौसम का मुख्य कारण मानसून का धीमा अग्रसर होना और हवा में अत्यधिक नमी का संयोजन है, जिसके चलते 40 डिग्री सेल्सियस से कम तापमान होने पर भी गर्मी का एहसास 45 डिग्री सेल्सियस से अधिक हो रहा है, जिससे लोग घरों में दुबकने को मजबूर हैं।

उमस और गर्मी से बेहाल जनजीवन

छत्तीसगढ़ में इस समय उमस और गर्मी अपने चरम पर है, जिससे आम जनजीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। दिन के समय सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहता है और बाजारों में भी ग्राहकों की भीड़ कम दिख रही है। लोग घरों में कैद रहने को मजबूर हैं या फिर ठंडी जगहों की तलाश में रहते हैं। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, राजनांदगांव और महासमुंद जैसे प्रमुख शहरों में सुबह 9 बजे से ही उमस का असर महसूस होने लगता है, जो दोपहर तक असहनीय हो जाता है। शाम और रात में भी हवा में नमी बनी रहने के कारण लोगों को पर्याप्त राहत नहीं मिल पा रही है, जिससे नींद भी प्रभावित हो रही है।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह स्थिति प्री-मानसून की गतिविधियों और दक्षिण-पश्चिम मानसून के आगमन में देरी के कारण बनी है। हवा में मौजूद अत्यधिक नमी और उच्च तापमान मिलकर 'फील लाइक' तापमान को कई डिग्री बढ़ा देते हैं, जिससे वास्तविक तापमान कम होने पर भी भीषण गर्मी का अनुभव होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ लोगों को पर्याप्त मात्रा में पानी पीने, ताजे फलों का सेवन करने, हल्के रंग के और सूती कपड़े पहनने तथा अनावश्यक रूप से धूप में निकलने से बचने की सलाह दे रहे हैं, क्योंकि ऐसी स्थिति में डिहाइड्रेशन, लू और हीट स्ट्रोक का खतरा काफी बढ़ जाता है। बच्चों और बुजुर्गों को विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

मौसम विभाग का पूर्वानुमान और राहत की उम्मीद

मौसम विभाग के रायपुर केंद्र द्वारा जारी नवीनतम पूर्वानुमान के अनुसार, अगले दो से तीन दिनों तक छत्तीसगढ़ में उमस भरी गर्मी का दौर जारी रहने की संभावना है। हालांकि, कहीं-कहीं स्थानीय प्रभाव के चलते हल्की बारिश या बूंदाबांदी हो सकती है, लेकिन इससे उमस में कोई खास कमी आने की उम्मीद नहीं है। विभाग ने बताया है कि बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी युक्त हवाएं और अरब सागर से आ रही अपेक्षाकृत शुष्क हवाओं के टकराव के कारण ऐसी स्थितियां बनी हुई हैं।

उत्पाद लोड हो रहे हैं…

आमतौर पर, जून के दूसरे सप्ताह तक दक्षिण-पश्चिम मानसून छत्तीसगढ़ में दस्तक दे देता है, लेकिन इस साल मानसून की गति धीमी होने के कारण इसके प्रदेश में आगमन में कुछ देरी हो रही है। मौसम वैज्ञानिकों का अनुमान है कि मानसून के 20 जून के आसपास या उसके बाद ही प्रदेश में सक्रिय होने की संभावना है। 18-19 जून के बाद मौसम में थोड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, जब कुछ स्थानों पर मध्यम बारिश की संभावना बनेगी, जिससे उमस में कमी आ सकती है और तापमान में गिरावट दर्ज की जा सकेगी। तब तक लोगों को धैर्य बनाए रखने और मौसम संबंधी चेतावनियों पर ध्यान देने की सलाह दी गई है।

प्रमुख जिलों का हाल और कृषि पर असर

प्रदेश के विभिन्न जिलों में अधिकतम तापमान सामान्य से 1 से 3 डिग्री सेल्सियस ऊपर बना हुआ है, जिससे गर्मी का प्रकोप बढ़ गया है। रायपुर में अधिकतम तापमान लगभग 38 से 39 डिग्री सेल्सियस के आसपास दर्ज किया जा रहा है, लेकिन उमस के कारण इसका अनुभव 42 से 44 डिग्री सेल्सियस जैसा हो रहा है। इसी तरह, बिलासपुर में भी तापमान लगभग 39 डिग्री सेल्सियस और दुर्ग में लगभग 38 डिग्री सेल्सियस के आसपास है, जहाँ उमस का स्तर भी काफी अधिक है। राजनांदगांव, महासमुंद, जांजगीर-चांपा, कोरबा और धमतरी जैसे जिलों में भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही बनी हुई है, जहाँ दिन के समय भीषण गर्मी और रात में भी उमस का असर देखा जा रहा है।

न्यूनतम तापमान भी सामान्य से ऊपर बना हुआ है, जिससे रात में भी लोगों को पंखे और एयर कंडीशनर की जरूरत पड़ रही है। मौसम विभाग ने यह भी बताया है कि दक्षिणी छत्तीसगढ़ के कुछ इलाकों जैसे जगदलपुर और दंतेवाड़ा में हल्की बारिश की संभावना है, लेकिन इसका असर पूरे मैदानी प्रदेश पर नहीं पड़ेगा। उत्तर छत्तीसगढ़ के जिलों जैसे अंबिकापुर और कोरिया में भी उमस और गर्मी का प्रभाव देखा जा रहा है, हालांकि मैदानी इलाकों की तुलना में वहां थोड़ी कम तीव्रता है। किसान समुदाय भी मानसून की देरी से चिंतित है, क्योंकि यह खरीफ फसलों की बुवाई और उनके शुरुआती विकास को प्रभावित कर सकता है, जिससे कृषि उत्पादन पर असर पड़ने की आशंका है।

टैग्स

और पढ़ें

लेखक
Dipti Das
दिप्ति दास साकार भारत की रिपोर्टर हैं। वे छत्तीसगढ़ और देश की ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज और जनहित के विषयों पर रिपोर्ट करती हैं।

आपकी प्रतिक्रिया