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छत्तीसगढ़: स्मृति ईरानी की मैराथन बैठक, किसान करेंगे सत्याग्रह

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छत्तीसगढ़: स्मृति ईरानी की मैराथन बैठक, किसान करेंगे सत्याग्रह
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मंगलवार, 23 मई, 2024 को छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर में राजनीतिक और सामाजिक हलचल तेज रही। केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ एक लंबी मैराथन बैठक की, जिसमें केंद्र सरकार की विभिन्न योजनाओं की प्रगति और उनके क्रियान्वयन पर गहन समीक्षा की गई। यह बैठक राज्य के विकास एजेंडे को गति देने और केंद्र-राज्य समन्वय को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित की गई थी। इसी बीच, राज्य के किसान संगठनों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर रायपुर के बूढ़ातालाब के पास सत्याग्रह शुरू किया, जिससे प्रशासन पर दबाव बढ़ गया। किसानों का यह प्रदर्शन कृषि क्षेत्र से जुड़ी समस्याओं और सरकारी नीतियों के प्रति उनकी असंतोष को उजागर करता है।

केंद्रीय मंत्री की गहन समीक्षा बैठक

केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने रायपुर में आयोजित इस मैराथन बैठक की अध्यक्षता की, जिसमें मुख्यमंत्री विष्णु देव साय सहित राज्य मंत्रिमंडल के कई सदस्य और विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। बैठक का मुख्य एजेंडा केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं, जैसे कि प्रधानमंत्री आवास योजना, जल जीवन मिशन, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना, और महिला एवं बाल विकास से संबंधित योजनाओं की प्रगति की समीक्षा करना था। सूत्रों के अनुसार, बैठक में इन योजनाओं के क्रियान्वयन में आ रही चुनौतियों और उनके समाधान पर विस्तृत चर्चा की गई। स्मृति ईरानी ने विशेष रूप से पोषण अभियान और आंगनवाड़ी सेवाओं के सुदृढ़ीकरण पर जोर दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वे जमीनी स्तर पर योजनाओं का लाभ लाभार्थियों तक सुनिश्चित करें और किसी भी प्रकार की शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी। इस बैठक का उद्देश्य राज्य में विकास कार्यों की गति को तेज करना और आगामी लोकसभा चुनावों के मद्देनजर सरकार की छवि को मजबूत करना भी था।

मुख्यमंत्री साय की सक्रिय भागीदारी और राज्य का विज़नमुख्यमंत्री विष्ण...

मुख्यमंत्री साय की सक्रिय भागीदारी और राज्य का विज़नमुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के साथ इस मैराथन बैठक में सक्रिय भागीदारी निभाई। उन्होंने राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न पहलों और योजनाओं की जानकारी दी, विशेष रूप से महतारी वंदन योजना और किसानों को धान के लंबित बोनस के भुगतान जैसे मुद्दों पर प्रकाश डाला। मुख्यमंत्री ने केंद्रीय मंत्री को राज्य की वित्तीय स्थिति, चुनौतियों और केंद्र से अपेक्षित सहयोग के बारे में भी अवगत कराया। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के "विकसित भारत" के संकल्प को पूरा करने के लिए प्रतिबद्ध है और छत्तीसगढ़ को विकास के पथ पर अग्रसर करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है। इस बैठक में राज्य के ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य सेवाओं और शिक्षा के क्षेत्र में सुधार पर भी महत्वपूर्ण चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने स्मृति ईरानी से आग्रह किया कि केंद्र सरकार राज्य की विशेष आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त सहायता प्रदान करे, खासकर नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में विकास परियोजनाओं के लिए।

किसानों का सत्याग्रह: लंबित मांगों पर आंदोलन

एक ओर जहां सरकार विकास और समीक्षा बैठकों में व्यस्त थी, वहीं दूसरी ओर राज्य के किसान अपनी लंबित मांगों को लेकर रायपुर के बूढ़ातालाब स्थित धरना स्थल पर सत्याग्रह पर बैठ गए। छत्तीसगढ़ किसान मजदूर संघ के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में हजारों की संख्या में किसान शामिल हुए। किसानों की प्रमुख मांगों में धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) 2700 रुपये प्रति क्विंटल करना, किसानों की कर्ज माफी, और सिंचाई सुविधाओं का विस्तार शामिल है। किसानों ने आरोप लगाया कि सरकार ने चुनाव से पहले किए गए वादों को पूरा नहीं किया है और वे अपनी मांगों को लेकर लगातार उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं। प्रदर्शनकारी किसानों ने सरकार से तत्काल बातचीत करने और उनकी मांगों पर सकारात्मक कार्रवाई करने की अपील की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर ध्यान नहीं दिया गया, तो वे अपने आंदोलन को और तेज करेंगे और राजधानी में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन करेंगे। किसान नेताओं ने सरकार से भूमि अधिग्रहण नीतियों में सुधार और फसल बीमा योजना को और अधिक प्रभावी बनाने की भी मांग की।

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राजनीतिक और सामाजिक प्रभाव

रायपुर में केंद्रीय मंत्री की बैठक और किसानों के सत्याग्रह ने राज्य की राजनीति और समाज पर गहरा प्रभाव डाला है। एक तरफ, केंद्रीय मंत्री की उपस्थिति और उच्च स्तरीय बैठकें केंद्र-राज्य संबंधों को मजबूत करने और विकास कार्यों को गति देने का संकेत देती हैं, वहीं दूसरी ओर किसानों का प्रदर्शन सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती पेश करता है। यह दिखाता है कि विकास की गति के साथ-साथ जमीनी स्तर पर जनता की अपेक्षाएं और समस्याएं भी महत्वपूर्ण हैं। सरकार को अब इन दोनों पहलुओं के बीच संतुलन साधने की आवश्यकता होगी। स्मृति ईरानी की बैठक से जहां राज्य में केंद्रीय योजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आने की उम्मीद है, वहीं किसानों के सत्याग्रह पर सरकार की प्रतिक्रिया आने वाले समय में राज्य की कृषि नीति और राजनीतिक स्थिरता को प्रभावित कर सकती है। विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे समय में जब आगामी चुनावों की तैयारियां चल रही हैं, सरकार को किसानों की मांगों को गंभीरता से लेना होगा ताकि किसी भी प्रकार के जनाक्रोश से बचा जा सके। यह घटनाक्रम राज्य में राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का एक नया दौर भी शुरू कर सकता है।

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लेखक
Dipti Das
दिप्ति दास साकार भारत की रिपोर्टर हैं। वे छत्तीसगढ़ और देश की ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज और जनहित के विषयों पर रिपोर्ट करती हैं।

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