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ग्राम सांगली में तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ स्तरीय रामसत्ता प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ

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ग्राम सांगली में तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ स्तरीय रामसत्ता प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ
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छत्तीसगढ़ के बालोद जिले के शांत ग्राम सांगली में शुक्रवार, 15 मार्च को तीन दिवसीय छत्तीसगढ़ स्तरीय रामसत्ता प्रतियोगिता का भव्य शुभारंभ हुआ। इस धार्मिक और सांस्कृतिक आयोजन में राज्य के विभिन्न जिलों से आए 25 से अधिक रामसत्ता दलों ने अपनी मधुर और भक्तिपूर्ण प्रस्तुतियों से पूरे वातावरण को राममय कर दिया। यह प्रतियोगिता न केवल भगवान श्रीराम के प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का एक मंच है, बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक कला और संस्कृति को संरक्षित करने तथा युवा पीढ़ी को इससे जोड़ने का एक महत्वपूर्ण प्रयास भी है। स्थानीय ग्राम पंचायत और युवा समिति द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण अंचलों में प्रचलित रामसत्ता गायन की परंपरा को जीवंत रखना और कलाकारों को प्रोत्साहन प्रदान करना है।

भव्य शुभारंभ और उत्साहपूर्ण माहौल

प्रतियोगिता का उद्घाटन समारोह अत्यंत भव्य रहा, जिसमें स्थानीय विधायक श्री रमेश पटेल ने मुख्य अतिथि के रूप में दीप प्रज्वलित कर कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि रामसत्ता हमारी सांस्कृतिक विरासत का अभिन्न अंग है और ऐसे आयोजन हमें अपनी जड़ों से जोड़े रखते हैं। उन्होंने आयोजकों की सराहना करते हुए कहा कि ग्राम सांगली ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि ग्रामीण अंचल भी बड़े सांस्कृतिक आयोजनों को सफलतापूर्वक संचालित कर सकते हैं। उद्घाटन के बाद, पहले दिन से ही प्रतियोगिता में शामिल हुए दलों ने एक से बढ़कर एक प्रस्तुतियां देना शुरू कर दिया। दर्शकों की भारी भीड़, जिसमें आसपास के गांवों से आए हजारों लोग शामिल थे, ने कलाकारों का उत्साह बढ़ाया। पूरा गांव भक्ति के रंग में डूबा हुआ महसूस हो रहा था, और हर तरफ "जय श्रीराम" के जयकारे गूंज रहे थे।

रामसत्ता का महत्व और सांस्कृतिक स्वरूप

रामसत्ता छत्तीसगढ़ की एक अनूठी भक्ति गायन शैली है, जिसमें भगवान श्रीराम के जीवन और महिमा पर आधारित भजनों, चौपाइयों और दोहों का सामूहिक गायन किया जाता है। यह अक्सर रात भर चलता है और इसमें हारमोनियम, तबला, मंजीरा, ढोलक जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों का उपयोग होता है। सांगली में आयोजित इस प्रतियोगिता में हर दल को अपनी प्रस्तुति के लिए एक निश्चित समय सीमा (45 मिनट) दी गई है, जिसमें उन्हें गायन की गुणवत्ता, लय, ताल और भक्ति भाव का प्रदर्शन करना होता है। विशेषज्ञ निर्णायक मंडल, जिसमें संगीत और धार्मिक विद्वान शामिल हैं, प्रदर्शनों का मूल्यांकन कर रहे हैं। इस आयोजन का उद्देश्य केवल प्रतिस्पर्धा नहीं, बल्कि रामसत्ता के माध्यम से सामाजिक सद्भाव और धार्मिक आस्था को मजबूत करना भी है। यह कला रूप पीढ़ी-दर-पीढ़ी मौखिक परंपरा के माध्यम से हस्तांतरित होता रहा है, और ऐसी प्रतियोगिताएं इसे नई ऊर्जा प्रदान करती हैं।

पुरस्कार और प्रोत्साहन का मंच

आयोजकों ने इस प्रतियोगिता को कलाकारों के लिए एक बड़ा प्रोत्साहन मंच बनाने की पूरी तैयारी की है। प्रतियोगिता में प्रथम स्थान प्राप्त करने वाले दल को 25,000 रुपये की नकद राशि, द्वितीय स्थान पर रहने वाले दल को 15,000 रुपये और तृतीय स्थान पर रहने वाले दल को 10,000 रुपये का पुरस्कार प्रदान किया जाएगा। इसके अतिरिक्त, कई सांत्वना पुरस्कार भी रखे गए हैं ताकि अधिकतम दलों को सम्मानित किया जा सके। आयोजक समिति के अध्यक्ष, श्री सुरेश साहू ने बताया कि पुरस्कार राशि का उद्देश्य कलाकारों को उनकी साधना के लिए प्रेरित करना है, ताकि वे इस पारंपरिक कला को आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित हों। उन्होंने यह भी कहा कि प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों और दर्शकों के लिए भोजन और ठहरने की उचित व्यवस्था भी की गई है, ताकि वे बिना किसी परेशानी के इस धार्मिक अनुष्ठान का हिस्सा बन सकें। यह आयोजन न केवल सांस्कृतिक महत्व रखता है, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी गति प्रदान करता है, क्योंकि स्थानीय व्यापारियों और छोटे व्यवसायों को भी इससे लाभ हो रहा है।

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सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और भविष्य की प्रेरणा

ग्राम सांगली की यह पहल छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। रामसत्ता जैसे पारंपरिक कला रूपों को अक्सर आधुनिक मनोरंजन के बढ़ते प्रभाव के कारण चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। ऐसे में, यह प्रतियोगिता न केवल इन कला रूपों को एक मंच प्रदान करती है, बल्कि नई पीढ़ी को भी अपनी संस्कृति से जुड़ने के लिए प्रेरित करती है। कई युवा दर्शक और प्रतिभागी इस कार्यक्रम से काफी प्रभावित हुए हैं, और उन्होंने भविष्य में इसमें सक्रिय रूप से भाग लेने की इच्छा व्यक्त की है। आयोजकों को उम्मीद है कि यह आयोजन रामसत्ता कला को नई ऊंचाइयों पर ले जाएगा और आने वाले वर्षों में और भी बड़े पैमाने पर आयोजित होगा। यह कार्यक्रम केवल एक प्रतियोगिता नहीं, बल्कि भक्ति, संस्कृति और सामुदायिक भावना का एक अद्भुत संगम है, जो ग्राम सांगली की पहचान बन गया है।

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लेखक
Dipti Das
दिप्ति दास साकार भारत की रिपोर्टर हैं। वे छत्तीसगढ़ और देश की ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज और जनहित के विषयों पर रिपोर्ट करती हैं।

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