रंगीलो रास गरबा: रायपुर में छत्तीसगढ़ी संस्कृति का अनूठा संगम | Raipur News Today
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आज की रायपुर खबर के अनुसार... रायपुर के जैनम मानस भवन में आज से 'रंगीलो रास गरबा' उत्सव का भव्य शुभारंभ हो गया है, जो आगामी पांच दिनों तक राजधानी में सांस्कृतिक उल्लास बिखेरेगा। श्री नवरंग कला एवं सांस्कृतिक मंच, रायपुर द्वारा आयोजित यह अनूठा कार्यक्रम गरबा के पारंपरिक गीतों और नृत्यों के साथ-साथ छत्तीसगढ़ी संस्कृति की मनमोहक झलक प्रस्तुत करेगा। यह आयोजन नवरात्रि के पावन अवसर पर राजधानीवासियों को गुजरात और छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अद्भुत संगम प्रदान करने के उद्देश्य से किया जा रहा है। इस उत्सव का मुख्य आकर्षण दोनों संस्कृतियों के fusion dance forms होंगे, जो दर्शकों को एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करने का वादा करते हैं और युवा पीढ़ी को अपनी जड़ों से जुड़ने का अवसर प्रदान करेंगे।
सांस्कृतिक संगम का अनूठा मंच
"रंगीलो रास गरबा" नाम ही इस सांस्कृतिक मिलन की कहानी कहता है। इस आयोजन का मूल विचार गरबा के पारंपरिक उत्साह को छत्तीसगढ़ की समृद्ध लोक कला और संस्कृति के साथ जोड़ना है। मंच पर प्रतिभागी न केवल गरबा की धुन पर थिरकेंगे, बल्कि उन्हें छत्तीसगढ़ के पारंपरिक परिधानों में सजे और स्थानीय लोकगीतों की धुन पर आधारित गरबा स्टेप्स करते हुए भी देखा जा सकेगा। आयोजकों का मानना है कि ऐसे आयोजन क्षेत्रीय पहचान को बढ़ावा देने और राष्ट्रीय एकता को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। नवरंग कला एवं सांस्कृतिक मंच के अध्यक्ष, श्री सुरेश साहू ने बताया कि उनका उद्देश्य केवल मनोरंजन प्रदान करना नहीं, बल्कि एक ऐसा मंच तैयार करना है जहाँ विभिन्न संस्कृतियों के लोग एक-दूसरे को समझ सकें। इस वर्ष, विशेष रूप से, छत्तीसगढ़ के प्रसिद्ध पंथी नृत्य और सुवा गीत की कुछ धुनें गरबा के संगीत में शामिल की गई हैं, जो इसे एक अद्वितीय श्रवण और दृश्य अनुभव* बनाएगी।
प्रतिभागियों और दर्शकों में उत्साह
इस भव्य आयोजन में भाग लेने के लिए शहर भर से 500 से अधिक प्रतिभागियों ने पंजीकरण कराया है, जिनमें बच्चे, युवा और वयस्क सभी शामिल हैं। प्रतिभागियों में गरबा सीखने और छत्तीसगढ़ी संस्कृति को जानने का जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है। पिछले एक महीने से जैनम मानस भवन में विशेष प्रशिक्षण शिविर आयोजित किए जा रहे थे, जहाँ प्रख्यात नृत्य गुरुओं ने प्रतिभागियों को गरबा के पारंपरिक स्टेप्स के साथ-साथ छत्तीसगढ़ी लोक नृत्यों की मूल बातें भी सिखाईं। दर्शकों के लिए भी यह उत्सव एक बड़ा आकर्षण है। पहले दिन ही 2,000 से अधिक लोग इस आयोजन के साक्षी बनने के लिए पहुंचे, जो इसकी लोकप्रियता को दर्शाता है। कई दर्शक पारंपरिक गुजराती और छत्तीसगढ़ी परिधानों में सजकर आए थे, जिससे आयोजन स्थल पर एक त्योहारी और रंगीन माहौल बन गया। आयोजकों ने बताया कि भीड़ को नियंत्रित करने और सभी की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 50 स्वयंसेवकों** की एक टीम तैनात की गई है, साथ ही पुलिस प्रशासन का भी सहयोग लिया जा रहा है।*
जैनम मानस भवन की भव्य साज-सज्जा
जैनम मानस भवन को 'रंगीलो रास गरबा' उत्सव के लिए भव्यता से सजाया गया है। प्रवेश द्वार से लेकर मुख्य मंच तक, पारंपरिक गरबा थीम और छत्तीसगढ़ी कला के तत्वों का सुंदर संयोजन देखने को मिल रहा है। रंगीन झालरें, आकर्षक रोशनी और फूलों की सजावट ने पूरे भवन को एक उत्सवपूर्ण और जादुई रूप दिया है। मंच को विशेष रूप से छत्तीसगढ़ी लोक कला जैसे भित्ति चित्रों और लकड़ी के नक्काशीदार डिजाइनों से सजाया गया है, जो राज्य की समृद्ध हस्तशिल्प परंपरा को दर्शाते हैं। उच्च गुणवत्ता वाले ध्वनि और प्रकाश प्रणालियों का उपयोग किया गया है ताकि संगीत की धुनें स्पष्ट रूप से सुनाई दें और नृत्य प्रदर्शन जीवंत लगें। आयोजन स्थल पर विभिन्न प्रकार के स्थानीय व्यंजनों के स्टॉल भी लगाए गए हैं, जहाँ दर्शक गुजरात और छत्तीसगढ़ दोनों के स्वादिष्ट पकवानों का आनंद ले सकते हैं, जिससे यह सिर्फ एक नृत्य उत्सव नहीं, बल्कि एक पूर्ण सांस्कृतिक और पाक अनुभव बन गया है। यह उत्सव निश्चित रूप से रायपुर के सांस्कृतिक कैलेंडर में एक मील का पत्थर साबित होगा।