छत्तीसगढ़ में महाष्टमी की धूम: देवी मंदिरों में उमड़ी भक्तों की भीड़
इस खबर की वेब स्टोरी देखें
छत्तीसगढ़ के विभिन्न देवी मंदिरों में आज महाष्टमी के पावन अवसर पर श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ पड़ा। प्रदेशभर के प्रमुख शक्तिपीठों में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं, जो मां दुर्गा के दर्शन और आशीर्वाद के लिए आतुर थे। राजधानी रायपुर सहित बिलासपुर, दुर्ग, जगदलपुर जैसे प्रमुख शहरों और ग्रामीण अंचलों के मंदिरों में भी आस्था का अद्भुत नजारा देखने को मिला। सुबह 10:51 बजे तक हजारों की संख्या में श्रद्धालु माता के चरणों में शीश नवा चुके थे, और यह क्रम अनवरत जारी है। इस अवसर पर विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें कन्या पूजन प्रमुख है, जो भक्तों द्वारा बड़े भक्ति भाव से किया जा रहा है।
प्रमुख मंदिरों में आस्था का सैलाब
प्रदेश के सुप्रसिद्ध दंतेश्वरी मंदिर दंतेवाड़ा, बम्लेश्वरी मंदिर डोंगरगढ़, महामाया मंदिर रतनपुर, और चामुंडा देवी मंदिर दुर्ग जैसे प्रतिष्ठित शक्तिपीठों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ी है। इन मंदिरों में रात 2 बजे से ही श्रद्धालु जुटना शुरू हो गए थे, ताकि वे सबसे पहले मां के दर्शन कर सकें। मंदिर परिसरों को रंग-बिरंगी लाइटों और फूलों से भव्य रूप से सजाया गया है, जिससे पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया है। जगह-जगह भजन-कीर्तन और दुर्गा चालीसा का पाठ गूंज रहा है, जो श्रद्धालुओं में नई ऊर्जा का संचार कर रहा है। प्रशासन ने भीड़ को नियंत्रित करने और सुचारु दर्शन सुनिश्चित करने के लिए 500 से अधिक पुलिसकर्मियों को तैनात किया है, साथ ही सीसीटीवी कैमरों से भी निगरानी रखी जा रही है।
विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान
महाष्टमी के दिन विशेष पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का अपना महत्व है। मंदिरों में आज हवन और यज्ञ का आयोजन किया जा रहा है, जिसमें बड़ी संख्या में भक्त शामिल होकर आहुतियां दे रहे हैं। कई स्थानों पर 108 दीपों से विशेष महाआरती की जा रही है, जिसका दिव्य प्रकाश और सुगंध पूरे वातावरण को पवित्र कर रहा है। इस दिन कन्या पूजन का विशेष विधान है, जिसमें नौ कुंवारी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा की जाती है, उन्हें भोजन कराया जाता है और उपहार दिए जाते हैं। मंदिर समितियों द्वारा भक्तों के लिए प्रसादी वितरण की भी व्यापक व्यवस्था की गई है, जिसमें खिचड़ी, हलवा और चना प्रमुख हैं। पुजारियों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ मां दुर्गा की स्तुति की जा रही है, जो भक्तों को आध्यात्मिक शांति प्रदान कर रही है।
श्रद्धालुओं में उत्साह और भक्ति भाव
महाष्टमी के पर्व पर श्रद्धालुओं में गजब का उत्साह और भक्ति भाव देखने को मिल रहा है। राज्य के दूर-दराज के ग्रामीण अंचलों से भी लोग अपनी मनोकामनाएं लेकर मंदिरों तक पहुंच रहे हैं। कई भक्त पैदल यात्रा कर या कांवर लेकर माता के दरबार में पहुंच रहे हैं, जो उनकी अटूट श्रद्धा का प्रतीक है। परिवारों के साथ बच्चों और बुजुर्गों ने भी इस धार्मिक आयोजन में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया है। भक्तों का मानना है कि महाष्टमी पर मां दुर्गा की आराधना करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। कई श्रद्धालुओं ने बताया कि वे पिछले कई सालों से इस दिन माता के दर्शन के लिए आते हैं और हर बार उन्हें एक नई ऊर्जा का अनुभव होता है। यह पर्व न केवल धार्मिक महत्व रखता है, बल्कि यह सामाजिक समरसता और एकजुटता का भी प्रतीक है।
प्रशासन की व्यवस्थाएं और सुरक्षा
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए स्थानीय प्रशासन और मंदिर समितियों द्वारा व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। पुलिस अधीक्षक श्रीमान राजेश वर्मा ने बताया कि सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद है और किसी भी अप्रिय घटना को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। मंदिरों के आसपास यातायात व्यवस्था को सुचारु रखने के लिए विशेष पुलिस बल तैनात किया गया है और कुछ मार्गों को वन-वे कर दिया गया है। भक्तों की सुविधा के लिए पेयजल और प्राथमिक उपचार केंद्रों की भी व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य विभाग की टीमें भी आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए अलर्ट पर हैं। मंदिर प्रबंधन ने स्वयंसेवकों की एक टीम भी लगाई है, जो भक्तों की सहायता कर रही है और भीड़ को नियंत्रित करने में सहयोग दे रही है। जिला कलेक्टर श्रीमती अंजना सिंह ने सभी श्रद्धालुओं से शांति और व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। अभी तक सभी मंदिरों में दर्शन शांतिपूर्ण और सुचारु रूप से चल रहे हैं।