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नवरात्रि 2026: वनांचल में मां चांग देवी, 309 ज्योति कलशों से जगमगाया दरबार

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नवरात्रि 2026: वनांचल में मां चांग देवी, 309 ज्योति कलशों से जगमगाया दरबार
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नवरात्रि 2026 के पावन अवसर पर, छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के सघन वनांचल क्षेत्र में स्थित प्राचीन और ऐतिहासिक मां चांग देवी मंदिर में भक्ति और उत्साह का अद्भुत संगम देखने को मिला। पूरे नौ दिनों तक चले इस महापर्व में, देश के कोने-कोने से आए हजारों श्रद्धालुओं ने मां के दिव्य दर्शन किए और अपनी श्रद्धा अर्पित की। मंदिर परिसर विशेष रूप से 309 ज्योति कलशों की दिव्य आभा से जगमगा उठा, जिसने पूरी घाटी को एक अलौकिक और आध्यात्मिक सौंदर्य प्रदान किया। यह भव्य आयोजन हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी सफलतापूर्वक संपन्न हुआ, जिसमें स्थानीय प्रशासन, मंदिर समिति और स्वयंसेसेवकों का महत्वपूर्ण योगदान रहा, जिससे भक्तों को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना नहीं करना पड़ा।

दिव्य ज्योति कलशों का महत्व और भक्ति का प्रदर्शन

मां चांग देवी के दरबार में प्रज्वलित 309 ज्योति कलश केवल दीपक नहीं, बल्कि भक्तों की अटूट आस्था, प्रार्थना और समर्पण के प्रतीक थे। प्रत्येक कलश किसी न किसी भक्त द्वारा अपनी मनोकामनाओं की पूर्ति या आभार व्यक्त करने के लिए स्थापित किया गया था। इन कलशों को शुद्ध देसी घी या तिल के तेल से नौ दिनों तक लगातार प्रज्वलित रखा गया, जो अखंड ज्योति की परंपरा का निर्वहन करता है। इन कलशों की व्यवस्था और रखरखाव एक जटिल कार्य होता है, जिसे मंदिर के पुजारियों और समर्पित स्वयंसेवकों की टीम ने अथक परिश्रम से संभाला। सुबह और शाम की आरती के समय, इन जगमगाते कलशों से निकलने वाली रोशनी और मंत्रोच्चार से पूरा वातावरण ऊर्जावान और पवित्र हो उठता था, जो श्रद्धालुओं को एक गहन आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता था। दूर-दराज से आने वाले भक्त इन कलशों के दर्शन कर स्वयं को धन्य महसूस कर रहे थे, मानो मां की साक्षात उपस्थिति का अनुभव कर रहे हों।

वनांचल की वादियों में आस्था का अनूठा केंद्र

मां चांग देवी मंदिर की ख्याति केवल धार्मिक महत्व के कारण ही नहीं, बल्कि इसकी मनमोहक और शांत प्राकृतिक स्थिति के कारण भी है। सघन वनों और पहाड़ियों से घिरी यह जगह भक्तों को शहरी जीवन की भागदौड़ से दूर एक शांत और पवित्र आश्रय प्रदान करती है। मंदिर के चारों ओर बहती हुई छोटी नदियां और झरनों की कलकल ध्वनि यहां के आध्यात्मिक माहौल को और भी बढ़ा देती है। स्थानीय लोककथाओं के अनुसार, यह मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना है और इसका संबंध रामायण काल से भी जोड़ा जाता है, हालांकि इसके पुरातत्विक साक्ष्य अभी भी खोजे जा रहे हैं। यह स्थान न केवल एक शक्तिपीठ के रूप में विख्यात है, बल्कि यह क्षेत्र की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का भी एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। दुर्गम रास्तों और सीमित सुविधाओं के बावजूद, हजारों भक्त हर वर्ष यहां पहुंचते हैं, जो मां के प्रति उनकी अदम्य श्रद्धा का प्रमाण है। इस वर्ष, बेहतर सड़क संपर्क और अस्थायी आवास व्यवस्थाओं ने भक्तों की यात्रा को थोड़ा आसान बनाया।

नवरात्रि महोत्सव की विशेष तैयारियां और आयोजन

नवरात्रि 2026 के सफल आयोजन के लिए मंदिर समिति और स्थानीय प्रशासन ने कई महीने पहले से ही तैयारियां शुरू कर दी थीं। सुरक्षा व्यवस्था पुख्ता की गई थी, जिसमें पुलिस बल के साथ-साथ स्वयंसेवक भी शामिल थे। भक्तों की सुविधा के लिए स्वच्छ पेयजल, शौचालय और प्राथमिक चिकित्सा शिविरों की व्यवस्था की गई थी। पूरे नौ दिनों तक सुबह से देर रात तक भजन-कीर्तन, दुर्गा चालीसा पाठ और अन्य धार्मिक अनुष्ठान चलते रहे। अष्टमी और नवमी के दिन विशेष हवन और कन्या पूजन का आयोजन किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने भाग लिया। शाम को स्थानीय कलाकारों द्वारा लोक नृत्य जैसे पंडवानी और गोंडी नृत्य प्रस्तुत किए गए, जिसने महोत्सव में चार चांद लगा दिए। मंदिर परिसर में विभिन्न प्रकार की प्रसाद और पूजन सामग्री की दुकानें भी लगाई गई थीं, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी बढ़ावा मिला। इस वर्ष, स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया गया था, जिसके लिए जगह-जगह कूड़ेदान लगाए गए थे और स्वयंसेवकों की टीम लगातार सफाई अभियान चला रही थी।

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समापन और भविष्य की उम्मीदें

नवरात्रि महोत्सव का समापन विजयादशमी के दिन मां की भव्य विदाई और महाआरती के साथ हुआ। भक्तों ने नम आंखों से मां को विदा किया और अगले वर्ष फिर आने का संकल्प लिया। इस वर्ष का आयोजन पिछली बार की तुलना में कहीं अधिक व्यवस्थित और भव्य रहा, जिससे मंदिर समिति और प्रशासन का मनोबल बढ़ा है। प्रशासन ने भविष्य में मंदिर तक पहुंचने के लिए स्थायी सड़क निर्माण और अन्य मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने का आश्वासन दिया है। मां चांग देवी का यह दरबार आस्था और प्रकृति के अनुपम मिलन का प्रतीक है, जो हर वर्ष हजारों लोगों को अपनी ओर आकर्षित करता है। यह महोत्सव केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं, बल्कि एक सामाजिक और सांस्कृतिक समागम भी था, जिसने लोगों को एकजुट किया और उनमें सकारात्मक ऊर्जा का संचार किया। भक्तजन मां के आशीर्वाद और नई उम्मीदों के साथ अपने घरों को लौटे, यह विश्वास लिए कि मां उनकी मनोकामनाएं अवश्य पूरी करेंगी।

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लेखक
Dipti Das
दिप्ति दास साकार भारत की रिपोर्टर हैं। वे छत्तीसगढ़ और देश की ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज और जनहित के विषयों पर रिपोर्ट करती हैं।

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