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छत्तीसगढ़ की दिव्या देवी ने जैविक खेती से बढ़ाया मान, मिला राष्ट्रीय सम्मान

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छत्तीसगढ़ की दिव्या देवी ने जैविक खेती से बढ़ाया मान, मिला राष्ट्रीय सम्मान
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छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले के मल्हार गांव की दिव्या देवी ने अपनी असाधारण लगन और दूरदर्शिता से जैविक खेती के क्षेत्र में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है। उन्हें हाल ही में नई दिल्ली में आयोजित एक गरिमामय समारोह में केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर द्वारा उत्कृष्ट जैविक खेती के लिए राष्ट्रीय सम्मान से नवाजा गया है। यह सम्मान न केवल दिव्या देवी के अथक प्रयासों का परिणाम है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ राज्य और विशेष रूप से ग्रामीण महिलाओं के लिए प्रेरणा का एक बड़ा स्रोत बन गया है। उन्होंने लगभग छह साल पहले जैविक खेती की शुरुआत की थी, जिसका उद्देश्य रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों से मुक्त स्वस्थ फसलें उगाना और मिट्टी की उर्वरता को बनाए रखना था। उनकी यह पहल अब एक सफल मॉडल बन चुकी है, जो पर्यावरण संरक्षण और किसानों की आर्थिक समृद्धि दोनों को बढ़ावा दे रही है।

जैविक खेती की राह: एक प्रेरणादायक यात्रा

दिव्या देवी की जैविक खेती की यात्रा उनके ससुर से मिली प्रेरणा से शुरू हुई थी। उन्होंने अपने ससुर के पारंपरिक खेती के ज्ञान को आधुनिक जैविक तकनीकों के साथ जोड़ा और एक अनूठा मॉडल विकसित किया। उनके पति राकेश निर्मलकर ने भी इस पूरी प्रक्रिया में उनका भरपूर साथ दिया। शुरुआत में, दिव्या देवी ने अपने परिवार की 3.5 एकड़ कृषि भूमि पर जैविक तरीकों को अपनाया। उनका मुख्य उद्देश्य रासायनिक खादों और कीटनाशकों के बढ़ते उपयोग से होने वाले नुकसान को कम करना और मिट्टी के प्राकृतिक संतुलन को बहाल करना था। उन्होंने यह महसूस किया कि रासायनिक खेती न केवल मिट्टी की गुणवत्ता को खराब कर रही है, बल्कि मानव स्वास्थ्य पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। इसलिए, उन्होंने पूर्ण रूप से जैविक खेती को अपनाने का दृढ़ संकल्प लिया, जिसमें उन्होंने पारंपरिक बीजों और प्राकृतिक उर्वरकों का उपयोग कर फसलों को उगाना शुरू किया।

आत्मनिर्भरता और नवाचार: दिव्या का अनूठा मॉडल

दिव्या देवी ने जैविक खेती में आत्मनिर्भरता का एक अद्भुत उदाहरण प्रस्तुत किया है। वह अपनी फसलों के लिए आवश्यक जैविक खाद और कीटनाशक स्वयं तैयार करती हैं। इसमें विशेष रूप से केंचुआ खाद (वर्मीकम्पोस्ट) और विभिन्न प्रकार के जैविक कीटनाशक शामिल हैं, जिन्हें वह प्राकृतिक सामग्री का उपयोग करके बनाती हैं। उनकी खेती में मुख्य रूप से धान, विभिन्न प्रकार की सब्जियां और मशरूम शामिल हैं। उन्होंने 'ज़ीरो बजट खेती' के सिद्धांतों को भी अपनाया ह, जिससे उत्पादन लागत कम होती है और किसानों को बेहतर मुनाफा मिलता है। दिव्या देवी का मानना है कि जैविक खेती न केवल स्वस्थ भोजन प्रदान करती है, बल्कि किसानों को रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर होने वाले भारी खर्च से भी बचाती है। उनकी फसलों की गुणवत्ता और स्वाद के कारण उन्हें बाजार में अच्छी कीमत मिलती है, जिससे उनकी आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है।

महिलाओं के लिए प्रेरणा और सशक्तिकरण

दिव्या देवी की सफलता केवल उनके खेत तक ही सीमित नहीं है, बल्कि उन्होंने इसे एक व्यापक सामाजिक आंदोलन का रूप दिया है। उन्होंने अपने गांव और आसपास के क्षेत्रों की अन्य महिलाओं को जैविक खेती के लिए प्रेरित और प्रशिक्षित किया है। अब तक, उन्होंने 100 से अधिक महिलाओं को जैविक खेती की बारीकियां सिखाई हैं, जिससे वे भी आत्मनिर्भर बन सकी हैं। इन महिलाओं ने समूह बनाकर जैविक उत्पादों का उत्पादन और विपणन शुरू किया है, जिससे उनकी आर्थिक स्थिति में सुधार हुआ है। दिव्या देवी ग्रामीण महिलाओं के लिए एक सशक्तिकरण का प्रतीक बन गई हैं, यह दिखाती हैं कि दृढ़ संकल्प और सही दिशा में किए गए प्रयासों से महिलाएं कृषि क्षेत्र में भी बड़ी सफलता हासिल कर सकती हैं। छत्तीसगढ़ सरकार भी जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए कई योजनाएं चला रही है, और दिव्या देवी जैसे किसान इन योजनाओं को जमीन पर उतारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

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राष्ट्रीय पहचान और भविष्य की दिशा

राष्ट्रीय सम्मान मिलना दिव्या देवी के लिए एक बड़ी उपलब्धि है और यह उनके काम को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाता है। यह सम्मान न केवल उन्हें, बल्कि छत्तीसगढ़ के उन सभी किसानों को प्रोत्साहित करेगा जो टिकाऊ और पर्यावरण-अनुकूल कृषि पद्धतियों को अपना रहे हैं। केंद्रीय कृषि मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर द्वारा उन्हें सम्मानित किया जाना इस बात का प्रमाण है कि जैविक खेती देश के कृषि भविष्य के लिए कितनी महत्वपूर्ण है। दिव्या देवी का लक्ष्य अब और अधिक किसानों को जैविक खेती से जोड़ना और उन्हें इसके लाभों के बारे में जागरूक करना है। वह चाहती हैं कि रासायनिक मुक्त भोजन सभी तक पहुंचे और मिट्टी की उर्वरता आने वाली पीढ़ियों के लिए बनी रहे। उनकी कहानी यह दर्शाती है कि कैसे एक व्यक्ति अपने प्रयासों से बड़े बदलाव ला सकता है और समाज व पर्यावरण दोनों के लिए एक सकारात्मक योगदान दे सकता है।ै

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लेखक
Dipti Das
दिप्ति दास साकार भारत की रिपोर्टर हैं। वे छत्तीसगढ़ और देश की ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज और जनहित के विषयों पर रिपोर्ट करती हैं।

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