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चीता संरक्षण में मील का पत्थर: नौरादेही में 'वियोम' और 'नीरा' की वापसी

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चीता संरक्षण में मील का पत्थर: नौरादेही में 'वियोम' और 'नीरा' की वापसी
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7 अक्टूबर, 2026 का दिन मध्यप्रदेश के वन्यजीव इतिहास में स्वर्णिम अक्षरों में दर्ज हो गया, जब मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सागर जिले में स्थित नौरादेही वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में दो चीतों को उनके नए घर में छोड़ा। इन चीतों का नामकरण 'वियोम' और 'नीरा' किया गया है, जो राज्य में चीता संरक्षण प्रयासों को एक नई दिशा देंगे। यह ऐतिहासिक घटना "वन्य प्राणी संरक्षण सप्ताह" के समापन समारोह का हिस्सा थी, जहाँ मुख्यमंत्री ने मध्यप्रदेश को चीतों की बसाहट के लिए सबसे अनुकूल स्थान घोषित किया। इस अवसर पर, उन्होंने गिद्ध संख्या आंकलन-2026 रिपोर्ट जारी की और बुंदेलखंडी भाषा में लिखी गई 'वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व' नामक पुस्तक का विमोचन भी किया।

चीता संरक्षण में मध्यप्रदेश की अग्रणी भूमिका

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने नौरादेही वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व में चीतों को छोड़ते हुए मध्यप्रदेश की वन्यजीव संरक्षण के प्रति प्रतिबद्धता को दोहराया। उन्होंने जोर देकर कहा कि मध्यप्रदेश की धरती चीतों की सफल बसाहट के लिए अत्यंत अनुकूल और आदर्श है। यह बयान भारत में चीता पुनर्वास परियोजना के व्यापक लक्ष्यों के अनुरूप है, जिसका उद्देश्य देश में विलुप्त हो चुके चीतों की प्रजाति को फिर से स्थापित करना है। नौरादेही का चुनाव इस परियोजना के लिए सावधानीपूर्वक किया गया है, क्योंकि यहाँ का पारिस्थितिक तंत्र चीतों के शिकार और प्रजनन के लिए उपयुक्त वातावरण प्रदान करता है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी प्रकाश डाला कि यह नया घर चीतों के लिए एक स्थायी और सुरक्षित आश्रय प्रदान करेगा, जिससे उनकी संख्या में वृद्धि और वन्यजीव संतुलन में सुधार की उम्मीद है। भारत में चीतों का पुनरुत्पादन एक महत्वपूर्ण कदम है जो देश की जैव विविधता को मजबूत करेगा और वैश्विक संरक्षण प्रयासों में योगदान देगा। मुख्यमंत्री ने इस बात पर भी जोर दिया कि चीतों की वापसी से क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी लाभ होगा।

स्थानीय समुदायों का सशक्तिकरण और सहभागिता

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अपने संबोधन में वन्यजीवों के साथ-साथ स्थानीय ग्रामवासियों के कल्याण पर भी विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि जब हम अपने वन्य प्राणियों की चिंता करते हैं, तो यह हमारा दायित्व है कि हम अपने ग्रामवासियों की भी चिंता करें, जो इन अभयारण्यों के आसपास सदियों से निवास कर रहे हैं। इस वर्ष, अभयारण्यों से लगभग 80 करोड़ रुपए का राजस्व संग्रह हुआ है, जिसमें से 20 करोड़ रुपए की राशि आसपास के ग्रामीणों को वितरित की गई है। मुख्यमंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि यह उनका हक है, क्योंकि वे इन क्षेत्रों में वर्षों से अपने घर और गांव आबाद कर रहे हैं। उन्होंने यह भी घोषणा की कि सरकार ने कैबिनेट में यह फैसला किया है कि जिन ग्रामवासियों को अब तक लाभ नहीं मिल रहा था, उन्हें भी लाभान्वित किया जाएगा। यह नीति स्थानीय समुदायों को संरक्षण प्रयासों में सक्रिय रूप से शामिल करने और उन्हें आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करने में मदद मिलेगी और सह-अस्तित्व को बढ़ावा मिलेगा। स्थानीय लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करना किसी भी दीर्घकालिक संरक्षण योजना के लिए महत्वपूर्ण है, और मध्यप्रदेश सरकार इस मॉडल को सफलतापूर्वक लागू कर रही है।

वन्यजीव संरक्षण के अन्य महत्वपूर्ण पहल

चीतों को छोड़ने के कार्यक्रम के दौरान, मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने अन्य महत्वपूर्ण वन्यजीव संरक्षण पहलों को भी उजागर किया। उन्होंने "गिद्ध संख्या आंकलन-2026 रिपोर्ट" जारी की, जो मध्यप्रदेश में गिद्धों की वर्तमान स्थिति और उनके संरक्षण के लिए आवश्यक कदमों पर प्रकाश डालती है। गिद्ध पारिस्थितिक तंत्र के महत्वपूर्ण सफाईकर्मी हैं, और उनकी घटती संख्या एक गंभीर चिंता का विषय रही है। इस रिपोर्ट का विमोचन उनके संरक्षण के प्रति सरकार की गंभीरता को दर्शाता है। इसके अतिरिक्त, मुख्यमंत्री ने बुंदेलखंडी भाषा में लिखी गई 'वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व' नामक एक पुस्तक का भी विमोचन किया। यह पहल स्थानीय भाषा में जानकारी प्रदान करके क्षेत्रीय लोगों को अपने वन्यजीव विरासत से जुड़ने और संरक्षण के महत्व को समझने में मदद करेगी। मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर विपक्षी दल कांग्रेस और उसके नेता राहुल गांधी पर भी सांकेतिक टिप्पणी की, यद्यपि विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं है, यह दर्शाता है कि राज्य सरकार अपनी नीतियों और निर्णयों को लेकर आत्मविश्वास में है। मध्यप्रदेश सरकार वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीण विकास के बीच संतुलन स्थापित करने के लिए निरंतर प्रयासरत है, ताकि एक स्थायी भविष्य सुनिश्चित किया जा सके और राज्य की समृद्ध जैव विविधता को संरक्षित रखा जा सके।

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लेखक
Dipti Das
दिप्ति दास साकार भारत की रिपोर्टर हैं। वे छत्तीसगढ़ और देश की ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज और जनहित के विषयों पर रिपोर्ट करती हैं।

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