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छत्तीसगढ़ में बाढ़ का विकराल रूप: 22 जिलों में तबाही, 15 मौतें

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छत्तीसगढ़ में बाढ़ का विकराल रूप: 22 जिलों में तबाही, 15 मौतें
छत्तीसगढ़

छत्तीसगढ़ राज्य इस समय भीषण बाढ़ की विभीषिका से जूझ रहा है, जिसने राज्य के 22 जिलों में व्यापक तबाही मचाई है। भारी मानसूनी बारिश और नदियों के उफान के कारण आई इस आपदा में अब तक 15 लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 1,083 गांवों के 74,000 से अधिक लोग सीधे तौर पर प्रभावित हुए हैं। राज्य के कई हिस्सों में जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया है, खेत जलमग्न हैं, और कई सड़कें तथा पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं, जिससे आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। प्रशासन द्वारा राहत और बचाव कार्य युद्धस्तर पर चलाए जा रहे हैं, लेकिन पानी का स्तर लगातार बढ़ने से चुनौतियां बनी हुई हैं।

बाढ़ का विकराल रूप और व्यापक क्षति

मानसून की सक्रियता के चलते छत्तीसगढ़ में बीते कुछ दिनों से लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने नदियों और जलाशयों को खतरे के निशान से ऊपर पहुंचा दिया है। इसके परिणामस्वरूप, राज्य के 22 जिलों में बाढ़ का पानी भर गया है, जिसमें विशेष रूप से निचले इलाकों में स्थिति गंभीर बनी हुई है। 1,083 गांवों में रहने वाले 74,000 से अधिक लोग विस्थापित हुए हैं या उनके घरों में पानी घुस गया है। अनेक कच्चे मकान ढह गए हैं, जबकि पक्के घरों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। बाढ़ के पानी ने कृषि भूमि को भी भारी क्षति पहुंचाई है, जिससे हजारों एकड़ धान और अन्य खरीफ फसलें बर्बाद हो गई हैं। किसानों के लिए यह एक बड़ा झटका है, क्योंकि उनकी आजीविका का मुख्य स्रोत खेती ही है। पशुधन को भी भारी नुकसान पहुंचा है, कई मवेशी बाढ़ के पानी में बह गए हैं या फंसे हुए हैं।

राहत एवं बचाव कार्य तेज, चुनौती बरकरार

राज्य सरकार ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव कार्यों में तेजी लाने के निर्देश दिए हैं। राष्ट्रीय आपदा प्रतिक्रिया बल (NDRF) और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) की टीमें स्थानीय प्रशासन के साथ मिलकर लगातार काम कर रही हैं। प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा रहा है और उनके लिए 200 से अधिक राहत शिविर स्थापित किए गए हैं। इन शिविरों में विस्थापितों को भोजन, पेयजल, दवाइयां और अन्य आवश्यक सामग्री उपलब्ध कराई जा रही है। हालांकि, कुछ दूरदराज के इलाकों तक पहुंचना अभी भी एक बड़ी चुनौती बना हुआ है, क्योंकि कई सड़कें पानी में डूबी हुई हैं या पुल क्षतिग्रस्त हो गए हैं। मुख्यमंत्री ने स्थिति का जायजा लेने के लिए एक उच्चस्तरीय बैठक बुलाई है और अधिकारियों को 24 घंटे निगरानी रखने के निर्देश दिए हैं।

मृतकों और लापता लोगों का आंकड़ा, भविष्य की चिंता

इस भीषण प्राकृतिक आपदा में अब तक 15 लोगों की दुखद मौत हो चुकी है। इनमें से कुछ लोग डूबने से मारे गए, जबकि कुछ मकान ढहने के कारण अपनी जान गंवा बैठे। प्रशासन द्वारा मृतकों के परिजनों को तत्काल सहायता राशि प्रदान करने की घोषणा की गई है। इसके अतिरिक्त, कुछ लोगों के लापता होने की भी खबरें हैं, जिनकी तलाश जारी है। बाढ़ के कारण हुई क्षति का आकलन अभी भी जारी है, लेकिन प्रारंभिक अनुमानों के अनुसार करोड़ों रुपये का नुकसान हुआ है। फसलों की बर्बादी, बुनियादी ढांचे का नुकसान और आजीविका के साधनों पर पड़े असर से राज्य की अर्थव्यवस्था पर दीर्घकालिक प्रभाव पड़ने की आशंका है। सरकार ने प्रभावित क्षेत्रों में महामारी फैलने की आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य टीमों को भी अलर्ट पर रखा है और विशेष चिकित्सा शिविर आयोजित किए जा रहे हैं।

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मुख्यमंत्री का दौरा और पुनर्वास के प्रयास

मुख्यमंत्री ने स्वयं कुछ बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई सर्वेक्षण किया और जमीनी स्थिति का आकलन किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि राहत कार्यों में कोई कमी न आए और प्रभावितों को हर संभव मदद पहुंचाई जाए। मुख्यमंत्री ने केंद्र सरकार से भी इस आपदा से निपटने के लिए अतिरिक्त सहायता का अनुरोध किया है। राज्य सरकार ने बाढ़ के पानी उतरने के बाद प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और क्षतिग्रस्त बुनियादी ढांचे के पुनर्निर्माण के लिए एक विस्तृत योजना तैयार करने का आश्वासन दिया है। किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए विशेष पैकेज की घोषणा की जा सकती है, ताकि वे जल्द से जल्द अपनी सामान्य जिंदगी में लौट सकें। यह आपदा छत्तीसगढ़ के लिए एक बड़ी चुनौती है, लेकिन राज्य प्रशासन और जनता मिलकर इस मुश्किल घड़ी का सामना करने को तैयार हैं।

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लेखक
Dipti Das
दिप्ति दास साकार भारत की रिपोर्टर हैं। वे छत्तीसगढ़ और देश की ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज और जनहित के विषयों पर रिपोर्ट करती हैं।

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