छत्तीसगढ़ में धनतेरस पर 12 हजार करोड़ का रिकॉर्ड कारोबार, 1.50 लाख गाड़ियां बिकीं
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धनतेरस के पावन अवसर पर, छत्तीसगढ़ राज्य में इस वर्ष अभूतपूर्व आर्थिक गतिविधियों का दौर देखा गया, जहां 12 हजार करोड़ रुपए से अधिक का विशाल कारोबार दर्ज किया गया। यह खरीदारी का बंपर सीजन राज्यभर के व्यापारियों और उपभोक्ताओं के लिए उत्साहजनक रहा। शुभ मुहूर्त में खरीदारी की परंपरा का पालन करते हुए, प्रदेशभर में 1.50 लाख से ज्यादा वाहनों की बिक्री हुई, जिसने बाजार में एक नई जान फूंक दी। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-रायगढ़ जैसे प्रमुख शहरी केंद्रों से लेकर जगदलपुर जैसे दूरस्थ क्षेत्रों तक, हर जगह खरीदारों की भारी भीड़ उमड़ी, जिससे प्रदेश की अर्थव्यवस्था में मजबूती और स्थिरता का स्पष्ट संकेत मिला। यह उत्साहपूर्ण खरीदारी न केवल त्योहार की खुशी का हिस्सा थी, बल्कि उपभोक्ताओं के बढ़ते विश्वास और बाजार में तरलता को भी दर्शाती है।
रिकॉर्ड तोड़ कारोबार और बाजार का उत्साह
छत्तीसगढ़ में धनतेरस का त्योहार इस बार व्यापारिक दृष्टि से ऐतिहासिक साबित हुआ। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, इस साल का कुल कारोबार पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड को तोड़ते हुए 12 हजार करोड़ रुपए के आंकड़े को पार कर गया। यह आंकड़ा दर्शाता है कि अर्थव्यवस्था ने तेजी से वापसी की है और उपभोक्ता अब खुलकर खर्च करने को तैयार हैं। धनतेरस पर शुभ खरीदारी की परंपरा के चलते, लोगों ने घरों, वाहनों, सोने-चांदी, इलेक्ट्रॉनिक्स और अन्य टिकाऊ उपभोक्ता वस्तुओं में भारी निवेश किया। रियल एस्टेट सेक्टर में भी अच्छी हलचल देखी गई। बाजारों में सुबह से देर रात तक खरीदारों की भीड़ लगी रही। रायपुर के एमजी रोड, जयस्तंभ चौक, बिलासपुर के सदर बाजार, और दुर्ग-रायगढ़ के प्रमुख व्यावसायिक इलाकों में पैर रखने की जगह नहीं थी। छोटे व्यापारियों से लेकर बड़े शोरूम मालिकों तक सभी के चेहरे पर रौनक देखी गई, क्योंकि उम्मीद से कहीं बेहतर कारोबार हुआ।
वाहनों की बंपर बिक्री और उपभोक्ता विश्वास
धनतेरस पर वाहनों की बिक्री ने इस बार सारे पिछले कीर्तिमान ध्वस्त कर दिए। पूरे छत्तीसगढ़ में 1.50 लाख से अधिक वाहनों की बिक्री दर्ज की गई, जिसमें दोपहिया और चारपहिया वाहन दोनों शामिल थे। यह आंकड़ा प्रदेश की बढ़ती गतिशीलता और आर्थिक समृद्धि का सीधा प्रमाण है। ऑटोमोबाइल डीलरों के अनुसार, त्योहारी छूट, आकर्षक फाइनेंस स्कीमें और नए मॉडलों की लॉन्चिंग ने उपभोक्ताओं को खरीदारी के लिए प्रेरित किया। विशेष रूप से, मध्यम वर्ग ने दोपहिया वाहनों में और उच्च मध्यम वर्ग ने चारपहिया वाहनों में जमकर निवेश किया। रायपुर और बिलासपुर जैसे बड़े शहरों में ऑटोमोबाइल शोरूम के बाहर लंबी कतारें देखी गईं। कई ग्राहकों ने महीनों पहले ही अपनी पसंदीदा गाड़ी बुक करा ली थी। बैंकों और अन्य वित्तीय संस्थानों ने भी इस अवसर का लाभ उठाते हुए आसान ऋण विकल्प पेश किए, जिससे वाहन खरीदना और भी सुलभ हो गया। यह बंपर बिक्री न केवल ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए वरदान साबित हुई, बल्कि उपभोक्ता विश्वास की बहाली का भी संकेत है।
प्रदेशव्यापी धनवर्षा और आर्थिक संकेत
इस धनतेरस पर खरीदारी का उत्साह किसी एक शहर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि यह पूरे छत्तीसगढ़ में फैल गया। रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग-रायगढ़ जैसे महानगरों के साथ-साथ, जगदलपुर, कोरबा, राजनांदगांव, अंबिकापुर और अन्य छोटे जिलों व कस्बों में भी रिकॉर्ड तोड़ बिक्री दर्ज की गई। यह दर्शाता है कि आर्थिक समृद्धि का लाभ केवल शहरी केंद्रों तक ही नहीं, बल्कि ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों तक भी पहुंच रहा है। स्थानीय बाजारों में भी ग्राहकों की भारी भीड़ देखी गई, जो छोटे दुकानदारों के लिए भी शुभ संकेत था। व्यापारियों ने बताया कि इस बार खरीदारों में सभी आयु वर्ग के लोग शामिल थे, जो विभिन्न प्रकार की वस्तुओं की तलाश में थे। सोने-चांदी की दुकानों पर महिलाओं की भीड़ थी, तो इलेक्ट्रॉनिक्स शोरूम में युवा वर्ग नए गैजेट्स खरीदने को उत्सुक था। इस व्यापक खरीदारी ने यह साबित कर दिया कि छत्तीसगढ़ की अर्थव्यवस्था में गहरी जड़ें जमा चुकी उपभोक्ता शक्ति है, जो त्योहारों के बहाने अपनी क्रय शक्ति का प्रदर्शन करती है। यह राज्य की आर्थिक स्थिरता और भविष्य के विकास के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है, जिससे आने वाले समय में और अधिक आर्थिक गतिविधियों की उम्मीद बढ़ गई है।