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चेतनलाल देवांगन को डॉ. तीजन बाई सम्मान: पंडवानी में 55 साल का योगदान

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चेतनलाल देवांगन को डॉ. तीजन बाई सम्मान: पंडवानी में 55 साल का योगदान
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छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के ध्वजवाहक और प्रख्यात पंडवानी गायक चेतनलाल देवांगन को हाल ही में डॉ. तीजन बाई सम्मान से सम्मानित किया गया है। यह प्रतिष्ठित सम्मान उन्हें पंडवानी गायन के क्षेत्र में उनके 55 वर्षों के अतुलनीय योगदान और 10,000 से अधिक सफल मंच प्रस्तुतियों के लिए दिया गया है, जिसके माध्यम से उन्होंने इस पारंपरिक लोककला को न केवल छत्तीसगढ़ बल्कि राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान दिलाई है। चेतनलाल देवांगन ने अपनी कला और समर्पण से महाभारत की गाथाओं को जीवंत कर, दर्शकों के दिलों में एक अमिट छाप छोड़ी है।

पंडवानी की विरासत और चेतनलाल का समर्पण

पंडवानी, महाभारत की कथाओं को लोक शैली में गाकर सुनाने की एक अनूठी कला है, जो छत्तीसगढ़ की पहचान है। यह कला गायन, अभिनय और कथावाचन का अद्भुत संगम है। चेतनलाल देवांगन की पंडवानी यात्रा तब शुरू हुई जब यह कला अपने शुरुआती चरणों में थी, और उन्होंने इसे एक आधुनिक मंच पर लाने तथा इसकी लोकप्रियता बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने अपनी युवावस्था से ही इस कला को अपना जीवन समर्पित कर दिया। गुरुओं से दीक्षा लेकर और गहन अभ्यास के माध्यम से, उन्होंने पंडवानी के दोनों शैलियों – कपालिक (जिसमें गायक खड़े होकर गाता है) और वेदमती (जिसमें गायक बैठकर गाता है) – में महारत हासिल की। उनके गायन में कथा के साथ-साथ संगीत, भाव और भंगिमाओं का ऐसा सुंदर समन्वय होता है कि दर्शक मंत्रमुग्ध हो जाते हैं। उनकी आवाज़ की दृढ़ता और कहानी कहने की क्षमता ने उन्हें पंडवानी के क्षेत्र में एक विशिष्ट स्थान दिलाया है।

55 वर्षों का अटूट सफर और 10,000 प्रस्तुतियाँ

चेतनलाल देवांगन का 55 वर्षों का कला सफर अथक परिश्रम, लगन और समर्पण की एक मिसाल है। इस दौरान उन्होंने 10,000 से अधिक प्रस्तुतियाँ दी हैं, जो अपने आप में एक अविश्वसनीय उपलब्धि है। यह संख्या उनकी कला के प्रति अटूट प्रतिबद्धता और दर्शकों के प्रति उनके प्रेम को दर्शाती है। उन्होंने न केवल छत्तीसगढ़ के गाँवों और शहरों में अपनी कला का प्रदर्शन किया है, बल्कि देश के विभिन्न सांस्कृतिक मंचों और विदेशों में भी पंडवानी को प्रस्तुत कर छत्तीसगढ़ का नाम रोशन किया है। उनकी हर प्रस्तुति महाभारत के पात्रों और घटनाओं को एक नया जीवन देती है, जिससे दर्शक स्वयं को उस कालखंड से जुड़ा हुआ महसूस करते हैं। उन्होंने अपनी शैली में पारंपरिक पंडवानी के मूल स्वरूप को बनाए रखते हुए, कुछ नवाचार भी किए हैं, जिससे यह कला आज की युवा पीढ़ी के लिए भी प्रासंगिक बनी रहे। उनकी प्रस्तुतियों में अक्सर हास्य, करुणा और वीर रस का ऐसा मिश्रण होता है जो दर्शकों को भावुक कर देता है।

डॉ. तीजन बाई सम्मान का महत्व

यह सम्मान इसलिए भी विशेष है क्योंकि यह महान पंडवानी गायिका डॉ. तीजन बाई के नाम पर दिया गया है, जो स्वयं इस कला की एक जीवित किंवदंती हैं और जिन्होंने पंडवानी को विश्वव्यापी पहचान दिलाई है। डॉ. तीजन बाई के नाम पर सम्मान मिलना चेतनलाल देवांगन के लिए एक बड़ी उपलब्धि है और यह उनके कलात्मक कौशल और योगदान की गहरी पहचान है। यह सम्मान न केवल चेतनलाल देवांगन के व्यक्तिगत प्रयासों को मान्यता देता है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की लोककलाओं और उनके कलाकारों के प्रति राज्य के समर्पण को भी दर्शाता है। यह उन सभी कलाकारों के लिए एक प्रेरणा स्रोत है जो गुमनामी में रहकर भी अपनी कला को जीवित रखने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यह सम्मान यह भी स्थापित करता है कि अथक प्रयास और प्रतिभा को हमेशा पहचान मिलती है। यह छत्तीसगढ़ी संस्कृति के संरक्षण और संवर्धन के लिए किए जा रहे प्रयासों को भी बल प्रदान करता है।

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भविष्य की प्रेरणा और लोककला का संरक्षण

चेतनलाल देवांगन जैसे कलाकार लोककला के भविष्य के लिए मार्गदर्शक हैं। उन्होंने अपनी कला के माध्यम से न केवल मनोरंजन किया है, बल्कि नैतिक मूल्यों, पौराणिक कथाओं और भारतीय संस्कृति की गहराइयों को भी जन-जन तक पहुंचाया है। उनका जीवन और उनकी कला यात्रा उन युवा कलाकारों के लिए एक प्रेरणा है जो लोक कलाओं में अपना करियर बनाना चाहते हैं। यह सम्मान सिर्फ चेतनलाल देवांगन का नहीं, बल्कि संपूर्ण पंडवानी समुदाय और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत का सम्मान है। यह छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक पहचान को राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर और अधिक पहचान दिलाने में सहायक होगा। ऐसे सम्मान लोक कलाओं को जीवित रखने और उन्हें अगली पीढ़ियों तक पहुंचाने के लिए आवश्यक प्रोत्साहन प्रदान करते हैं, जिससे हमारी सांस्कृतिक धरोहर अक्षुण्ण बनी रहे।

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लेखक
Dipti Das
दिप्ति दास साकार भारत की रिपोर्टर हैं। वे छत्तीसगढ़ और देश की ताज़ा खबरें, राजनीति, समाज और जनहित के विषयों पर रिपोर्ट करती हैं।

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