वडोदरा में धनतेरस: सोना-चांदी रिकॉर्ड स्तर पर, ₹350 करोड़ कारोबार की उम्मीद
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वडोदरा में प्रकाश पर्व दिवाली के पावन शुभारंभ, धनतेरस के शुभ अवसर पर, सर्राफा बाजार में अप्रत्याशित रौनक और भारी उत्साह देखने को मिला। 06 नवंबर 2026 को, शहर के प्रमुख वाणिज्यिक क्षेत्रों जैसे अलकापुरी, मांडवी और रावपुरा में स्थित नामी शोरूम्स और स्थानीय दुकानों पर सुबह से ही ग्राहकों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। कीमती धातुओं, सोने और चांदी की कीमतों में ऐतिहासिक और रिकॉर्ड तोड़ तेजी के बावजूद, वडोदरा के निवासियों ने पारंपरिक शगुन को बनाए रखने और समृद्धि की कामना के लिए जमकर खरीदारी की। स्थानीय ज्वैलर्स और व्यापारिक संगठनों के शुरुआती अनुमानों के अनुसार, इस बार धनतेरस पर वडोदरा शहर में लगभग ₹250 करोड़ से लेकर ₹350 करोड़ तक के सोने और चांदी के बिकने की प्रबल संभावना जताई जा रही है, जो पिछले कई वर्षों के रिकॉर्ड को तोड़ सकती है।
रिकॉर्ड तोड़ कीमतें और बाजार का रुझान
इस धनतेरस पर वडोदरा के सर्राफा बाजार में सोने और चांदी की कीमतों ने सभी पिछले रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं, जो ग्राहकों के लिए एक आश्चर्यजनक स्थिति थी। बाजार में दर्ज की गई ताजा दरों के मुताबिक, 10 ग्राम सोने का भाव उछलकर ₹1,47,200 के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गया है, जो निवेशकों और खरीदारों दोनों के लिए एक महत्वपूर्ण आंकड़ा है। इसी तरह, 1 किलोग्राम चांदी की कीमत भी ₹1,98,500 के स्तर को छू चुकी है, जो इसकी बढ़ती मांग और सीमित आपूर्ति को दर्शाता है। यह वृद्धि केवल एक दिन की नहीं है, बल्कि पिछले महज 5 दिनों के आंकड़ों पर नजर डालें तो सोने के भाव में प्रति 10 ग्राम ₹5,000 का जोरदार उछाल आया है। वहीं, चांदी भी इसी अवधि में प्रति किलोग्राम ₹6,000 तक महंगी हुई है। विश्लेषकों का मानना है कि सोने और चांदी की कीमतों में यह अभूतपूर्व वृद्धि वैश्विक आर्थिक अनिश्चितताओं और सुरक्षित निवेश के रूप में कीमती धातुओं की बढ़ती अपील का परिणाम है। आमतौर पर, इतनी तीव्र मूल्य वृद्धि के कारण खरीदारी में कमी देखी जाती है, लेकिन वडोदरा में स्थिति इसके विपरीत रही। स्थानीय ज्वैलर्स का कहना है कि ग्राहक कीमतों की परवाह किए बिना खरीदारी के लिए उत्सुक थे, जिसे वे धनतेरस के शुभ शगुन के रूप में देखते हैं।
ग्राहकों का उत्साह और खरीदारी का पैटर्न
कीमतों में लगातार हो रही इस बढ़ोतरी के बाद भी वडोदरा शहरवासियों का खरीदारी को लेकर उत्साह थोड़ा भी फीका नहीं पड़ा है। सुबह से ही अलकापुरी, मांडवी और रावपुरा जैसे प्रमुख वाणिज्यिक और पारंपरिक बाजारों में नामी शोरूम्स से लेकर स्थानीय दुकानों तक ग्राहकों की भारी भीड़ नजर आ रही थी। यह भीड़ केवल देखने के लिए नहीं थी, बल्कि लोग उत्साहपूर्वक खरीदारी भी कर रहे थे। ग्राहकों का कहना है कि धनतेरस का दिन समृद्धि और सौभाग्य का प्रतीक है, और इस दिन सोना-चांदी खरीदना एक शुभ परंपरा है जिसे वे हर कीमत पर निभाना चाहते हैं। खरीदारी के पैटर्न पर गौर करें तो, इस बार ग्राहकों ने विविध प्रकार के उत्पादों में रुचि दिखाई। पारंपरिक शगुन को कायम रखने के लिए लोग विशेष रूप से सोने और चांदी के सिक्के खरीदने पर जोर दे रहे थे। इसके अलावा, हल्के गहने और लक्ष्मी पूजन के लिए चांदी की मूर्तियों व बर्तनों की भी जमकर खरीदारी हुई। चांदी के दीपक, पूजा थाल और कलश जैसे आइटम भी ग्राहकों की पसंद बने हुए थे। युवा पीढ़ी भी इस परंपरा में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले रही थी, जो ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से खरीदारी कर रही थी।
व्यापारिक संगठनों की सकारात्मक प्रतिक्रिया
वडोदरा के स्थानीय ज्वैलर्स और व्यापारिक संगठनों ने इस धनतेरस पर हुए कारोबार को लेकर काफी सकारात्मक प्रतिक्रिया दी है। शुरुआती अनुमानों के अनुसार, शहर में लगभग ₹250 करोड़ से लेकर ₹350 करोड़ तक के सोने और चांदी के बिकने की प्रबल संभावना जताई जा रही है। यह आंकड़ा पिछले वर्षों के मुकाबले काफी अधिक है, खासकर तब जब कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर थीं। वडोदरा ज्वैलर्स एसोसिएशन के एक प्रतिनिधि ने बताया, "हमें उम्मीद थी कि कीमतों में इतनी वृद्धि के कारण बिक्री पर असर पड़ेगा, लेकिन ग्राहकों का उत्साह अप्रत्याशित रहा। यह वडोदरा के लोगों की गहरी आस्था और त्योहारों के प्रति उनके अटूट विश्वास को दर्शाता है।" इस बड़े कारोबार से न केवल सर्राफा उद्योग को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी नई जान फूंकने की उम्मीद है। धनतेरस की यह शानदार शुरुआत पूरे दिवाली के सप्ताह के लिए एक सकारात्मक संकेत है, जिससे आगे भी अच्छी बिक्री की उम्मीद है।
वडोदरा में उत्सव का भव्य माहौल
धनतेरस पर वडोदरा में केवल सर्राफा बाजार ही नहीं, बल्कि पूरा शहर उत्सव के रंग में रंगा हुआ था। खरीदारी के साथ-साथ, शहर में सांस्कृतिक और मनोरंजक गतिविधियां भी चरम पर थीं। दिवाली के अवसर पर वडोदरा का अकोटा सोलर ब्रिज रामायण की LED रोशनी से सराबोर हो गया, जिसने शहर की सुंदरता में चार चांद लगा दिए और लोगों की भारी भीड़ को आकर्षित किया। यह रोशनी और सजावट लोगों के बीच उत्सव की भावना को और बढ़ा रही थी। सड़कों पर रौनक, दुकानों में जगमगाहट और बाजारों में चहल-पहल ने एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान किया। यह रिकॉर्ड तोड़ कारोबार न केवल वडोदरा के सर्राफा बाजार के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ है, बल्कि यह दर्शाता है कि भारतीय त्योहारों की आर्थिक और सांस्कृतिक शक्ति कितनी मजबूत है, जो किसी भी आर्थिक चुनौती का सामना करने में सक्षम है।