मध्य प्रदेश: ईद मिलादुन्नबी पर 'जुलूस-ए-मोहम्मदी', लाखों की भीड़, गूंजे नारे
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बीते दिन, मध्य प्रदेश में इस्लाम के आखरी पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की आमद का पवित्र पर्व ईद मिलादुन्नबी पूरे धार्मिक उल्लास और धूमधाम के साथ मनाया गया। इस अवसर पर भोपाल, खंडवा, धार सहित राज्य के विभिन्न जिलों में मुस्लिम समाज द्वारा विशाल 'जुलूस-ए-मोहम्मदी' निकाला गया, जिसमें हजारों की संख्या में बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों सहित समाजजनों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। रंग-बिरंगी पोशाकें पहने लोग हाथों में इस्लामी झंडे लहराते हुए, पैगंबर साहब की शान में नारे लगाते और नात-ए-शरीफ पढ़ते हुए शहर की सड़कों पर निकले, जिससे चारों ओर भक्ति और खुशी का माहौल छा गया। यह पर्व पैगंबर मोहम्मद साहब के जन्मदिवस को चिह्नित करता है और मुस्लिम समुदाय के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है, जो उन्हें प्रेम, शांति और भाईचारे का संदेश देता है। इस भव्य आयोजन में शामिल होने के लिए समाज के हर वर्ग से लोग उमड़ पड़े, जिससे मध्य प्रदेश के कई शहर गूंज उठे।
खंडवा में 'जुलूस-ए-मोहम्मदी' की धूम
खंडवा जिले में ईद मिलादुन्नबी का पर्व विशेष धूमधाम से मनाया गया, जहाँ 'जुलूस-ए-मोहम्मदी' ने शहर को भक्तिमय बना दिया। सुबह ठीक 9 बजे इमलीपुरा चौराहे से यह विशाल जुलूस निकला, जो शहर के प्रमुख मार्गों से होकर गुजरा। जुलूस का मार्ग बड़ाबम्ब, बॉम्बे बाजार, घंटाघर, टाउन हॉल और जलेबी चौक से होते हुए वापस इमलीपुरा में समाप्त हुआ। इस पूरे मार्ग पर हजारों की संख्या में मुस्लिम समाज के लोग, विशेषकर युवा, हाथों में हरे और सफेद इस्लामी झंडे लहराते हुए और पैगंबर मोहम्मद साहब की शान में जोरदार नारे लगाते हुए आगे बढ़ रहे थे। जुलूस में नात-ए-शरीफ का पाठ लगातार जारी रहा, जिससे वातावरण पूरी तरह से आध्यात्मिक हो गया था। इस भव्य आयोजन का नेतृत्व शहर काजी और मुस्लिम समाज के अन्य वरिष्ठजनों ने किया। सुरक्षा की दृष्टि से पूरे समय पुलिस बल सड़कों पर मुस्तैद रहा, ताकि जुलूस शांतिपूर्ण और सुचारू रूप से संपन्न हो सके। यह आयोजन खंडवा के इतिहास में सबसे बड़े धार्मिक आयोजनों में से एक बन गया, जिसने शहर की सांस्कृतिक विविधता को प्रदर्शित किया।
धार में दिखा अभूतपूर्व उत्साह
धार जिले में भी ईद मिलादुन्नबी के अवसर पर मुस्लिम समाज द्वारा एक विशाल जुलूस निकाला गया, जिसमें अभूतपूर्व उत्साह देखने को मिला। इस जुलूस में बुजुर्गों, युवाओं और बच्चों सहित समाज के सभी वर्गों से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। जुलूस के दौरान पैगंबर हजरत मोहम्मद साहब की शान में नात-ए-पाक पेश की गई, जिसने उपस्थित सभी लोगों को भाव-विभोर कर दिया। मुस्लिम समाजजनों ने एक-दूसरे को ईद मिलादुन्नबी की दिल खोलकर मुबारकबाद दी, जिससे भाईचारे और सौहार्द का संदेश प्रसारित हुआ। कई स्थानों पर धर्मगुरुओं और समाज के वरिष्ठजनों का पुष्प मालाएं पहनाकर और पुष्प वर्षा करके भव्य स्वागत किया गया, जो उनके प्रति सम्मान का प्रतीक था। यह जुलूस धार शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरा, जिसमें विभिन्न मस्जिदों के सदर, धर्मगुरु और समाज के अन्य वरिष्ठजन विशेष रूप से उपस्थित रहे। धार में इस पर्व ने सामुदायिक एकता और धार्मिक सद्भाव की एक अनूठी मिसाल पेश की, जिसने सभी धर्मों के लोगों को प्रभावित किया। यह पर्व मुस्लिम समाज के लिए खुशी, उत्साह और आध्यात्मिक नवीनीकरण का एक महत्वपूर्ण अवसर होता है।
राज्यभर में भक्तिमय वातावरण और सुरक्षा व्यवस्था
मध्य प्रदेश में ईद मिलादुन्नबी का पर्व सिर्फ खंडवा और धार तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि राजधानी भोपाल सहित राज्य के अनेक अन्य जिलों में भी इसी तरह के भव्य और शांतिपूर्ण जुलूस निकाले गए। हर जगह मुस्लिम समाज ने पैगंबर मोहम्मद साहब के आदर्शों को याद करते हुए खुशियां मनाईं। इन आयोजनों के माध्यम से एकता, भाईचारे और धार्मिक सौहार्द का संदेश पूरे राज्य में गूंजा। लोग रंगीन पारंपरिक वेशभूषा में सजे हुए थे, हाथों में झंडे थे और उनकी जुबान पर पैगंबर साहब की शान में नारे और नात-ए-शरीफ थी। यह दृश्य न केवल मुस्लिम समुदाय के लिए, बल्कि राज्य में समग्र शांति और सह-अस्तित्व के लिए भी एक प्रेरक था। पुलिस प्रशासन द्वारा सभी जुलूस मार्गों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। विभिन्न चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस बल तैनात किया गया था ताकि किसी भी अप्रिय घटना से बचा जा सके और जुलूस शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो सके। राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि लोग बिना किसी डर या बाधा के अपनी धार्मिक आस्था का प्रदर्शन कर सकें। ईद मिलादुन्नबी का यह पर्व मध्य प्रदेश में एक बार फिर धार्मिक सद्भाव और सांस्कृतिक विविधता का प्रतीक बन गया, जिससे राज्य की गंगा-जमुनी तहजीब और मजबूत हुई।
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