दिल्ली एयरपोर्ट पर एअर इंडिया के तीन विमान क्षतिग्रस्त, DGCA ने जांच शुरू की
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दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रविवार शाम लगभग 4:30 बजे अचानक आए भीषण तूफान और तेज बारिश के कारण एअर इंडिया के तीन पतनी बॉडी वाले A320 विमान गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो गए। इस गंभीर घटना के तुरंत बाद, विमानन सुरक्षा नियामक नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने मामले की गहन जांच शुरू कर दी है, जिसका उद्देश्य भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना है। यह दुर्घटना तब हुई जब पार्किंग में खड़े इन विमानों को तेज हवाओं के कारण अपनी जगह से खिसके हुए बाहरी वस्तुओं और जमीनी उपकरणों (ग्राउंड सपोर्ट इक्विपमेंट) ने अपनी चपेट में ले लिया, जिससे एअर इंडिया को बड़ा नुकसान हुआ।
घटना का विस्तृत विवरण
रविवार शाम को, भारत के सबसे व्यस्त हवाई अड्डे, दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट के टर्मिनल-2 पर मौसम अप्रत्याशित रूप से बेहद खराब हो गया। आसमान में अचानक काले बादल छा गए और तेज आंधी के साथ मूसलाधार बारिश शुरू हो गई। इसी दौरान, पार्किंग में सुरक्षित खड़े माने जा रहे एअर इंडिया के तीन A320 विमान अप्रत्याशित रूप से बाहरी वस्तुओं और जमीनी उपकरणों की चपेट में आ गए।
आधिकारिक बयान के अनुसार, आंधी की तीव्रता इतनी अधिक थी कि इसने पास के स्टैंड और आसपास के इलाकों में रखे गए दो ग्राउंड उपकरण को अपनी जगह से बलपूर्वक खिसका दिया। ये उपकरण, जो आमतौर पर विमानों की सर्विसिंग, ईंधन भरने और अन्य जमीनी कार्यों के लिए उपयोग किए जाते हैं, अनियंत्रित होकर तेज रफ्तार से दो अलग-अलग विमानों से जा टकराए। इस जोरदार टकराव से विमानों के विभिन्न हिस्सों में महत्वपूर्ण क्षति हुई। क्षतिग्रस्त हुए विमानों में से एक की दाहिनी तरफ की स्लाइडिंग विंडो पूरी तरह से टूट गई, जबकि अन्य दो विमानों को उनके बाहरी ढांचे पर गंभीर नुकसान पहुंचा। यह घटना एक बार फिर हवाई अड्डों पर खराब मौसम के दौरान सुरक्षा प्रोटोकॉल की समीक्षा और उन्हें अधिक प्रभावी बनाने की आवश्यकता पर बल देती है, खासकर जब अप्रत्याशित मौसम का सामना करना पड़े।
विमानों को नुकसान कैसे पहुंचा?
विमानों को नुकसान पहुंचाने वाले ग्राउंड सपोर्ट इक्विपमेंट का अपनी जगह से खिसकना ही इस दुर्घटना का मुख्य और सीधा कारण रहा। तेज हवाओं का वेग इतना अधिक था कि वह इन भारी-भरकम उपकरणों को भी स्थिर नहीं रख सका, जो आमतौर पर सुरक्षित रूप से पार्क किए जाते हैं। एयरपोर्ट ऑपरेटर द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, मौसम बिगड़ने के कारण अपनी जगह से खिसकने वाले ये ग्राउंड उपकरण एअर इंडिया इंजीनियरिंग और इंडिगो कंपनियों के थे। इन उपकरणों में ट्रॉली या सीढ़ी वाले वाहन जैसे ग्राउंड सपोर्ट इक्विपमेंट शामिल थे।
ये अनियंत्रित उपकरण टर्मिनल 2 पर खड़े एअर इंडिया के विमानों से टकराए, जिसके परिणामस्वरूप विमानों को भौतिक क्षति हुई। यह घटना हवाई अड्डों पर ग्राउंड सपोर्ट इक्विपमेंट को सुरक्षित रखने के लिए नए और अधिक मजबूत एंकरिंग सिस्टम की आवश्यकता को स्पष्ट रूप से उजागर करती है, खासकर ऐसे मौसम की भविष्यवाणी होने पर। यह स्पष्ट रूप से दर्शाता है कि खराब मौसम की स्थिति में हवाई अड्डे पर जमीनी स्तर पर सुरक्षा उपायों को कितनी गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। ऐसे उपकरणों को ऐसे तरीके से सुरक्षित किया जाना चाहिए जिससे वे अप्रत्याशित और अत्यधिक मौसम की स्थिति में भी पूरी तरह से स्थिर और सुरक्षित रहें, ताकि विमानों को कोई नुकसान न हो।
DGCA की जांच और आगे की कार्रवाई
इस घटना की गंभीरता और यात्रियों की सुरक्षा पर इसके संभावित प्रभाव को देखते हुए, नागरिक उड्डयन महानिदेशालय (DGCA) ने तुरंत प्रभाव से मामले की सघन जांच शुरू कर दी है। सोमवार को जारी एक आधिकारिक बयान में स्पष्ट किया गया कि यात्रियों की सुरक्षा को सर्वोपरि रखते हुए, क्षतिग्रस्त हुए सभी तीनों विमानों को फिलहाल ग्राउंडेड कर दिया गया है, यानी उन्हें तत्काल प्रभाव से उड़ान सेवा से हटा लिया गया है।
अब इन विमानों का विस्तृत तकनीकी निरीक्षण किया जाएगा ताकि क्षति की पूरी सीमा का आकलन किया जा सके और यह सुनिश्चित किया जा सके कि कोई भी संरचनात्मक या कार्यात्मक खामी न रह जाए। इसके बाद आवश्यक मरम्मत का काम पूरा किया जाएगा। DGCA और एअर इंडिया के इंजीनियर यह सुनिश्चित करेंगे कि विमान पूरी तरह से सुरक्षित और उड़ान योग्य हैं, तभी उन्हें दोबारा सेवा में शामिल किया जाएगा। इस प्रक्रिया में समय लग सकता है, जिससे एअर इंडिया के परिचालन पर अस्थायी प्रभाव पड़ेगा।
DGCA की जांच रिपोर्ट से यह साफ हो सकेगा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए एयरपोर्ट ऑपरेटरों और एयरलाइंस को किन नए प्रोटोकॉल और सुरक्षा उपायों का पालन करना होगा। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि खराब मौसम के दौरान हवाई अड्डों पर जमीनी परिचालन के लिहाज से सुरक्षा उपाय कितने महत्वपूर्ण हैं और उनमें निरंतर सुधार और सख्त अनुपालन की आवश्यकता है ताकि ऐसी दुर्घटनाओं को रोका जा सके।
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